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Mohali News: मोबाइल की लत कर रही रियल लाइफ से दूर

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मोहाली। आजकल लोग रिश्तों के बिना रह सकते हैं लेकिन मोबाइल के बिना रहना मुश्किल लगता है। मोबाइल का अनियंत्रित, अनुचित और अत्यधिक इस्तेमाल हमारे शरीर के लिए घातक होता है। लगातार बढ़ रहे मोबाइल के इस्तेमाल और इसके दुष्प्रभावों को लेकर एमडी मनोचिकित्सक हरवंदन कौर बेदी से बात की गई। उन्होंने बताया कि रोजमर्रा की जिंदगी में मोबाइल की लत आधुनिक जमाने की चुनौती बन गई है। यह हमें रियल लाइफ व अपनों से दूर कर रही है। लगभग 27.9 प्रतिशत युवा वर्ग इसकी चपेट में आ गए हैं। इंसान अपना अत्यधिक समय मोबाइल के इस्तेमाल में ही लगा देता है। यह जानते हुए भी कि यह उसके काम में रुकावट बन रहा है जिससे उसके व्यवसाय, पढ़ाई आदि पर असर पड़ रहा है। वह अपने सामाजिक कार्य पूरे नहीं कर पा रहा है। उन जगहों पर भी मोबाइल का उपयोग कर रहा है जो उचित नहीं है। जब उसे मोबाइल न मिले तो वह बेचैन और चिड़चिड़ा हो जाता है और उसे लगने लगता है कि वह कुछ जानकारी से वंचित हो रहा है और उसका ध्यान वहीं रहता है। इससे शारीरिक बीमारियां जैसे मोटापा, पीठ में दर्द, मांसपेशियों में जकड़न, आंखें खराब होना, थकावट हो सकती है। मानसिक समस्याएं जैसे लत लग जाना, (शराब और नशा भी एक किस्म के हैं), नींद न पूरी होना, एकाग्रता में समस्या, घबराहट और उदासी का शिकार होना और अकेलापन लगने लग जाता है।
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इस लत से बचने के लिए उपाय
1. जहां तक हो सके 22-23 साल से पहले बच्चों के हाथ में मोबाइल न दें, इससे बच्चे का दिमाग पूरी तरह से विकसित नहीं होता।

2. फोन जरूरत है, इसलिए एक निश्चित समय तय करें। बेवजह इस्तेमाल न करें।

3. मोबाइल का ज्यादा इस्तेमाल करना पड़ता है तो दिन में कुछ समय मोबाइल से दूर रहें। हो सके तो उसकी मोबाइल बंद कर दें। बाहर जाएं कुदरत के साथ समय बिताएं।
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4. सोने के समय बच्चों के कमरे में मोबाइल नहीं होना चाहिए। सोने के दो घंटे पहले मोबाइल छोड़ दें।

5. घर के सदस्यों को रात का खाना साथ में खाना चाहिए, उस समय आपस में बातचीत करें ताकि रिश्तों में प्यार बना रहे।

6. स्थिति ज्यादा खराब होने पर मनोविज्ञानिक या मनोचिकित्सक से सलाह लें।
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