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Mohali News: कुत्तों का आतंक, राहगीरों पर झपट रहे झुंड<bha>;</bha> डॉग फीडिंग पॉइंट योजना छह माह से ठप

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कुत्तों के हमले से लोग भयभीत, प्रशासन की सुस्ती और हाउस की बैठक के इंतजार में अटकी योजना
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संवाद न्यूज एजेंसी
जीरकपुर। लावारिस कुत्तों के बढ़ते आतंक के बीच जीरकपुर में डॉग फीडिंग पॉइंट बनाने की योजना छह महीने से अधर में लटकी है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश और शहरवासियों की शिकायतों के बाद प्रशासन ने यह फैसला लिया था। प्रत्येक वार्ड में पांच-पांच फीडिंग पॉइंट बनाने का लक्ष्य था। इसके लिए पांच पार्षदों की एक समिति भी गठित की गई थी, लेकिन अब तक कोई प्रगति नहीं हुई है।


कुत्तों के झुंड राहगीरों पर झपट रहे हैं और काटने की घटनाएं बढ़ रही हैं। इससे लोगों में डर का माहौल है। प्रशासन ने हाउस की बैठक में प्रस्ताव पेश किया था। इसका उद्देश्य सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर कुत्तों को खाना डालने की समस्या को नियंत्रित करना था। निर्धारित स्थानों पर खाना मिलने से राहगीरों को परेशानी से बचाया जा सकता था। पांच पार्षदों की समिति को लोगों की सहमति से स्थान तय करने थे। लेकिन समिति बनने के बाद योजना पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। लोग अब जहां जगह मिलती है, वहीं कुत्तों के लिए खाना डाल देते हैं। सड़क, गली या कॉलोनी के रास्तों पर कुत्तों के झुंड जमा हो जाते हैं। ये झुंड अपने क्षेत्र में आने वाले राहगीरों को देखकर आक्रामक हो जाते हैं। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और दोपहिया वाहन चालकों को अधिक परेशानी होती है। यह परेशानी भबात, लोहगढ़, बलटाना, प्रीत कॉलोनी, ढकोला और ढकोली जैसे इलाकों में ज्यादा है। इन क्षेत्रों में कॉलोनियों को जोड़ने वाले संकरे रास्तों पर कुत्तों के झुंड बैठे रहते हैं। राहगीरों के निकलने पर कुत्तों के पीछे दौड़ने से हादसे का खतरा बना रहता है। यदि निर्धारित फीडिंग पॉइंट बन जाएं तो लोगों को जहां-तहां खाना डालने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे कुत्तों के झुंड भी एक निश्चित स्थान पर रहेंगे और राहगीरों की परेशानी कम हो सकती है।
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योजना का उद्देश्य और वर्तमान स्थिति



योजना का मुख्य उद्देश्य लावारिस कुत्तों को व्यवस्थित तरीके से खाना उपलब्ध कराना था। इससे सार्वजनिक स्थानों पर खाना डालने से होने वाली गंदगी और परेशानी रुकती। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बाद प्रशासन ने यह फैसला लिया था। प्रत्येक वार्ड में पांच फीडिंग पॉइंट बनाने का प्रस्ताव था। इन निर्धारित स्थानों पर लोग कुत्तों को खाना खिला सकते थे। इससे कुत्तों को एक जगह खाना मिलने के साथ-साथ राहगीरों को भी परेशानी से बचाया जा सकता था। लेकिन छह महीने बाद भी यह व्यवस्था लागू नहीं हो सकी है। वर्तमान में लोग अपनी सुविधा के अनुसार कहीं भी खाना डाल रहे हैं। इससे कुत्तों के झुंड एक जगह जमा हो जाते हैं और राहगीरों के लिए खतरा पैदा करते हैं।



पार्षदों की समिति का निष्क्रिय होना



हाउस की बैठक में प्रस्ताव पारित होने के बाद पांच पार्षदों की एक समिति बनाई गई थी। इस समिति का काम लोगों की सहमति से फीडिंग पॉइंट के लिए स्थान चिह्नित करना था। समिति को वार्ड स्तर पर इन स्थानों का चयन करना था। हालांकि, छह महीने बीत जाने के बाद भी समिति ने कोई प्रगति नहीं की है। न तो स्थानों का चयन हुआ है और न ही फीडिंग पॉइंट विकसित किए गए हैं। लोगों को यह भी जानकारी नहीं है कि समिति की कोई बैठक हुई है या नहीं। योजना किस स्तर पर अटकी है, यह भी स्पष्ट नहीं है।



डॉग फीडिंग पॉइंट बनाने का फैसला लोगों की सुरक्षा और कुत्तों को व्यवस्थित तरीके से खाना उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से लिया गया था। छह माह पहले प्रस्ताव और कमेटी बनाने के बावजूद योजना लागू नहीं हुई। फीडिंग पॉइंट नहीं होने के कारण लोग अपनी सुविधा के अनुसार कहीं भी खाना डाल रहे हैं, जिससे एक ही जगह कुत्तों के झुंड जमा हो जाते हैं और राहगीरों के लिए खतरा पैदा होता है। प्रशासन को अब इस योजना को कागजों से निकालकर जमीन पर लागू करना चाहिए। -धरमिंदर गौतम, पूर्व पार्षद



ढकोली में कॉलोनियों को जोड़ने वाले रास्तों और तंग गलियों में लावारिस कुत्तों की समस्या लगातार बनी हुई है। लोग जहां खाना डालते हैं, वहां कुत्तों का झुंड इकट्ठा हो जाता है और बाद में रास्ते से गुजरने वालों के पीछे दौड़ता है। कई बार बच्चे और बुजुर्ग भी डर के कारण रास्ता बदलकर निकलते हैं। अगर फीडिंग पॉइंट तय हो जाएं तो लोगों को भी पता रहेगा कि कुत्तों को कहां खाना देना है और राहगीरों की परेशानी भी कम होगी। -संतोख सिंह, निवासी ढकोली।
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डॉग फीडिंग पॉइंट को लेकर प्रशासन हाउस की बैठक होने का इंतजार कर रहा है, जो अभी तक नहीं हो सकी है। हाउस की ओर से गठित पांच पार्षदों की कमेटी की रिपोर्ट बैठक में पेश की जाएगी। रिपोर्ट पर चर्चा और निर्णय के बाद ही फीडिंग पॉइंट बनाने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा। -परविंदर सिंह भट्टी, ईओ, नगर परिषद, जीरकपुर
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