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विरोध के बाद मीट मार्केट तोड़ने गई टीम लौटी बैरंग, हंगामा

Fri, 10 Jun 2016 10:08 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, मोहाली
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विरोध के बाद मीट मार्केट तोड़ने गई टीम लौटी बैरंग, हंगामा - फोटो : अमर उजाला
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जीरकपुर में पुरानी कालका रोड पर बनी मीट मार्केट को लेकर प्रशासन और दुकानदार आमने-सामने आ गए हैं। वीरवार को माल विभाग, पुलिस व नगर काउंसिल की टीमें मीट मार्केट को हटाने पहुंची, लेकिन मीट व्यापारियों के विरोध के कारण उन्हें बैरंग लौटना पड़ा।
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वहीं, मीट मार्केट के दुकानदारों का आरोप है कि स्थानीय नगर काउंसिल के अधिकारी एक बिल्डर और राजनीतिक दबाव के कारण यह कार्रवाई कर रही है। वहीं, मीट मार्केट के दुकानदारों के समर्थन में कांग्रेसी नेता में आए गए हैं।
जानकारी के अनुसार, वीरवार को कार्यकारी अधिकारी परविंदर सराओं, एमई विनय महाजन, एसडीओ अशोक कुमार शर्मा व राजबीर सिंह बराड़, जीरकपुर के नवनियुक्त नायब तहसीलदार परमजीत सिंह, एसएचओ तरलोचन सिंह पुलिस पार्टी सहित पुरानी कालका रोड पर बनी मीट मार्केट को हटाने पहुंचे थे। अधिकारी अपने साथ दो जेसीबी और करीब 300 कर्मचारियों को साथ ले गए थे।
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मीट मार्केट हटाने की जब कार्रवाई शुरू हुई तो दुकानदारों ने इसका विरोध शुरू कर दिया। दुकानदारों ने आरोप लगाया कि जीरकपुर नगर काउंसिल हलका विधायक एनके शर्मा के इशारे पर काम कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई एक बिल्डर को फायदा पहुंचाने के लिए की जा रही है। वहीं, कांग्रेस के महासचिव दीपेंदर सिंह ढिल्लों और मनप्रीत कौर डॉली ने दुकानदारों का समर्थन में विरोध प्रदर्शन किया। सुबह 8 से दोपहर साढ़े 12 बजे तक हंगामा चलता रहा। अधिकारियों को मीट मार्केट हटाने में सफलता नहीं मिली। इसके बाद अधिकारी की टीम को बैरंग लौटना पड़ा।

ये हुआ था दुकानदारों के साथ समझौता
जनवरी में पुरानी कालका रोड की वाइडनिंग करने के लिए नगर काउंसिल और मीट मार्केट के बीच एक समझौता हुआ था। इसके अनुसार नगर काउंसिल मीट मार्केट के दुकानदारों को पुनर्वास योजना के तहत जमीन का टुकड़ा अलाट करेगी। दुकानों को तैयार करने की जिम्मेदारी दुकानदारों की होगी। लेकिन, कुछ दिनों बाद नगर काउंसिल द्वारा अलाट की गई जमीन पर 25 दुकानों का निर्माण कर दिया गया।

‘अमर उजाला’ में खबर प्रकाशित होने के बाद हुआ था खुलासा
‘अमर उजाला’ ने मामले की तहकीकात शुरू की तो नगर काउंसिल का घपला निकलकर सामने आया था। दरअसल, काउंसिल ने जो जमीन अलॉट की थी वह ड्रेनेज विभाग की है। इन पर एक बिल्डर ने पैसे खर्च करके दुकानें तैयार करवाई थीं। ‘अमर उजाला’ ने 31 जनवरी के अंक में ‘नगर परिषद की मीट मार्केट के निर्माण पर उठ रहे सवाल’ शीर्षक से खबर प्रमुखता से प्रकाशित की थी। इसके बाद दुकानदारों ने नगर काउंसिल से समझौता खत्म कर दिया था।
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