सीबीआई कोर्ट ने सुनाया फैसला, दोनों को अगवा कर किया था एनकाउंटर
एक पुलिसकर्मी की सास की भी घर में गोलियां मारकर की थी हत्या
संवाद न्यूज एजेंसी
मोहाली। 1992 में दो पुलिस मुलाजिमों को अगवा कर फर्जी एनकाउंटर मारने और लाश को अज्ञात बताकर संस्कार करने के मामले में सीबीआई अदालत ने पूर्व एसएचओ सहित तीन पुलिस मुलाजिमों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। यही नहीं तीनों एक महिला की भी हत्या में भी दोषी पाए गए हैं। तीनों दोषियों पर साढ़े सात लाख रुपये जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माना न देने की सूरत में इन्हें तीन साल कैद और काटनी होगी। आरोपियों को सोमवार सीबीआई कोर्ट ने दोषी करार दिया था। मामला सीबीआई की स्पेशल जज राकेश गुप्ता की अदालत में विचाराधीन था। अदालत ने सुनवाई दौरान दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद उस समय के थाना सिटी तरनतारन इंचार्ज रहे गुरबचन सिंह, एएसआई रेशम सिंह और पुलिस कर्मचारी हंसराज सिंह को धारा 302 व 120बी में उम्रकैद की सजा सुनाई है। इसके अलावा भी विभिन्न धाराओं में दोषी पाए जाने पर कुछ और सजाएं एकसाथ चलेंगी। अदालत ने सोमवार को तीनों दोषियों को हिरासत में लेकर जेल भेजने के निर्देश जारी किए थे। इस मामले में ट्रॉयल के दौरान आरोपी पुलिस मुलाजिम अर्जुन सिंह की दिसंबर 2021 में मौत हो गई थी।
30 नवंबर 1992 को किया था एनकाउंटर
सीबीआई की ओर से अदालत में दायर की गई चार्जशीट अनुसार जगदीप सिंह उर्फ मक्खन को एसएचओ गुरबचन सिंह की अगुवाई में पुलिस ने अगवा कर लिया था। अगवा करने से पहले पुलिस ने घर में गोली चलाई और गोली लगने के कारण मक्खन की सास सविंदर कौर की मौत हो गई थी। यह घटना 18 नवंबर 1992 की है। काफी मशक्कत के बाद सीबीआई ने यह जांच खोली जिसमें तीनों दोषी पाए गए। इसी तरह गुरनाम सिंह उर्फ पाली को एसएचओ गुरबचन सिंह और अन्य पुलिस अधिकारियों ने 21 नवंबर 1992 को उसके घर से अगवा किया। गुरनाम सिंह उर्फ पाली व जगदीप सिंह उर्फ मक्खन को 30 नवंबर 1992 को गुरबचन सिंह के नेतृत्व में पुलिस पार्टी ने फर्जी एनकाउंटर में मार दिया था।
पुलिस ने यह बनाई थी कहानी
पुलिस ने जो एफआईआर दर्ज की उसमें यह दर्शाया कि एसएचओ गुरबचन सिंह सहित उनकी पुलिस पार्टी को 30 नवंबर 1992 की सुबह गश्त दौरान एक युवक गाड़ी में घूमता हुआ दिखाई दिया। नूर की अड्डा तरनतारन के नजदीक युवक को संदिग्ध हालात में काबू किया गया। गाड़ी चलाने वाला युवक गुरनाम सिंह उर्फ पाली था। पूछताछ के दौरान उसने रेलवे रोड टीटी और दर्शन सिंह के प्रोविजन स्टोर में हैंड ग्रेनेड फेंकने की बात कबूल की, जिसके बाद उसे काबू कर लिया।
पुलिस ने कहा-आतंकी हमला हुआ तो चलानी पड़ी गोली
पुलिस ने कहा गुरनाम सिंह पाली को बेहला बाग में कथित तौर पर छिपाए गए हथियारों और गोला बारूद की बरामदगी के लिए लाया गया तो बाग के अंदर पुलिस पर आतंकी हमला हुआ। क्रॉस फायरिंग में हुई। गुरनाम सिंह उर्फ पाली बचने की नियत से गोलियों की दिशा में भागा पर दोनों तरफ से हुई फायरिंग में उसे गोली लग गई और उसकी मौत हो गई। वहीं, जगदीप सिंह उर्फ मक्खन को उन्होंने आतंकी हमला करने वाली टीम में शामिल बताया। दोनों के शवों का संस्कार श्मशानघाट में लावारिस मानकर कर दिया। बता दें कि मृतक जगदीप सिंह मक्खन पंजाब पुलिस में सिपाही था और मृतक गुरनाम सिंह पाली पंजाब पुलिस में एसपीओ था।
1997 में सीबीआई ने दर्ज की थी एफआईआर
सीबीआई ने 27 फरवरी 1997 को गुरबचन सिंह व अन्य के खिलाफ धारा 364, 302, 34 के तहत मामला दर्ज किया और जांच पूरी होने के बाद गुरबचन सिंह व अन्य के खिलाफ चार्जशीट दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट ने अज्ञात का शव बताकर संस्कार करने के मामले में जांच के निर्देश दिए थे।
24jjrp15- बेरी। कार्यक्रम को संबोधित करते इंद्रेश कुमार। स्त्रोत- आयोजक- फोटो : udhampur