मोहाली। भूमि अधिग्रहण की अधिसूचना जारी होने के बाद जमीन खरीदने वाले व्यक्ति को लैंड पूलिंग पॉलिसी के तहत वैकल्पिक जमीन या प्लॉट का लाभ नहीं मिलेगा। मोहाली की एडीजे कोर्ट ने गांव चाओ माजरा की 19.58 मरला जमीन से जुड़े एक मामले में यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने अधिग्रहण से पहले जमीन के मालिक रहे रंजीत सिंह के नाम लैंड पूलिंग पॉलिसी के तहत लेटर ऑफ इंटेंट (एलओआई) जारी करने के निर्देश दिए हैं। वहीं, बाद में जमीन खरीदने वाली प्रीति यादव को इस लाभ से वंचित कर दिया है।
मामला गांव चाओ माजरा की 19.58 मरला जमीन से जुड़ा है। रिकॉर्ड के अनुसार जमीन के मालिक रंजीत सिंह थे। पंजाब सरकार के आवास एवं शहरी विकास विभाग ने 17 अक्तूबर 2019 को जमीन अधिग्रहण के लिए प्रारंभिक अधिसूचना जारी की थी। अदालत के रिकॉर्ड के मुताबिक अधिसूचना जारी होने के बाद रंजीत सिंह ने यह जमीन प्रीति यादव के पक्ष में बेच दी। इस बिक्री की म्यूटेशन 23 सितंबर 2020 को नंबर 1848 के तहत हुई। प्रीति यादव ने वर्ष 2018-19 की जमाबंदी के आधार पर लैंड पूलिंग पॉलिसी के तहत आवासीय प्लॉट/कमर्शियल साइट के लिए आवेदन किया था।
अदालत ने माना- अधिसूचना के बाद खरीदी जमीन
अदालत ने कहा कि प्रीति यादव ने जमीन खरीदते समय सक्षम अधिकारी से आवश्यक छूट भी प्राप्त नहीं की थी। सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए अदालत ने कहा कि अधिग्रहण की अधिसूचना जारी होने के बाद जमीन खरीदने वाला व्यक्ति अधिग्रहण की प्रक्रिया को चुनौती नहीं दे सकता। ऐसे खरीदार को कानून के अनुसार मुआवजा मांगने का अधिकार हो सकता है, लेकिन वह मूल भूमि मालिक के लिए उपलब्ध लैंड पॉलिसी के लाभ का हकदार नहीं बनता।
मूल मालिक के नाम जारी होगा एलओआई
अदालत ने स्पष्ट किया कि लैंड पूलिंग पॉलिसी का लाभ उस व्यक्ति को मिलना है, जो अधिग्रहण की अधिसूचना जारी होने के समय जमीन का मालिक था। इसलिए प्रीति यादव को वैकल्पिक जमीन/प्लॉट का लाभ देने से इनकार करते हुए अदालत ने रंजीत सिंह के नाम उचित रसीद और पहचान के बाद लेटर ऑफ इंटेंट जारी करने के निर्देश दिए हैं। फैसले की प्रति आवश्यक कार्रवाई के लिए गमाडा को भेजने के भी निर्देश दिए गए हैं।