मोहाली। भारतीय किसान यूनियन (राजेवाल) ने फेज-8 स्थित पंचायत विभाग के मुख्य कार्यालय, विकास भवन के गेट के सामने धरना दिया। किसान नेता और कार्यकर्ताओं का कहना था कि पंजाब में कई सरपंचों और पंचायतों को बिना किसी कारण निलंबित किया जा रहा है और पंचायतों की सरकारी जमीनों की बिक्री की तैयारी की जा रही है। यही मुख्य वजह थी कि यूनियन ने सरकार और विभाग के खिलाफ यह जोरदार प्रदर्शन किया। पंजाब भर से आए किसान नेता और यूनियन कार्यकर्ताओं ने धरना दिया। उन्होंने अधिकारियों और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और हटाए गए सरपंचों की बहाली तथा जमीनों की सुरक्षा की मांग की।
पंचायत विभाग के डायरेक्टर से मुलाकात
धरने के दौरान किसान नेताओं ने विभागीय डायरेक्टर से मुलाकात की, किसान नेताओं का कहना है कि उनका रवैया किसानों के प्रति विरोधी रहा। बैठक में किसानों के बैठने के लिए पांच कुर्सियों का इंतजाम भी नहीं किया गया, जिससे उनकी नाराजगी और बढ़ गई। किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल ने कहा कि ओटालां और राणवां के सरपंचों को भी बिना वजह हटाया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब सरकार एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी, पंजाब एग्रो, मोहाली की आधुनिक फल और सब्जी मंडी और पंचायतों की सरकारी जमीनों को बेचने की तैयारी में है। राजेवाल ने पंजाब सरकार के वित्तीय प्रबंधन पर भी हमला किया। उनका कहना था कि गैर-तजुर्बेकार लोगों के कारण पंजाब चार लाख 88 हजार करोड़ का कर्जदार बन गया है और अगर यह स्थिति जारी रही तो 2027 तक पंजाब का कर्ज पांच लाख करोड़ से अधिक हो जाएगा।
किसान नेताओं ने बनाई रणनीति
इस मौके पर किसान नेता परमिंदर सिंह चलाकी, सुखविंदर सिंह माछीवाड़ा, गुरमीत सिंह कप्याल, किरपाल सिंह सियाउ, परमदीप सिंह बैदवान समेत कई अन्य नेता उपस्थित थे। राजेवाल ने चेतावनी दी कि यदि अधिकारियों ने हटाए गए सरपंचों को बहाल नहीं किया और पंचायतों की जमीनों की बिक्री रोकने के लिए कार्रवाई नहीं की, तो संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) जल्द ही बड़ा आंदोलन करने से पीछे नहीं हटेगा।