मोहाली। पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री और रंगमंच जगत को गहरे सदमे में डालते हुए कॉमेडी के बादशाह जसविंदर सिंह भल्ला शनिवार को पंचतत्व में विलीन हो गए। पूरे मान-सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार बलौंगी स्थित श्मशान घाट में किया गया। वहां बेटे पुखराज भल्ला ने उन्हें मुखाग्नि दी। फेज-7 स्थित निवास से उनकी अंतिम यात्रा निकली। रास्ते भर हजारों लोग नम आंखों से अपने प्रिय कलाकार को विदा करने पहुंचे। घर से लेकर श्मशान घाट तक हर ओर भल्ला को अंतिम झलक पाने के लिए जनसैलाब उमड़ पड़ा। कलाकार, गायक, राजनेता, रिश्तेदार और आम लोग सबकी आंखें अपने प्रिय कॉमेडी किंग को खोने के गम में भरी रहीं। इस दौरान उनकी पत्नी परमदीप भल्ला, बेटा पुखराज और बेटी अर्शदीप कौर सदमे में दिखे।
भीग गई आंखें
गिप्पी ग्रेवाल, बिन्नू ढिल्लों समेत हर कलाकार की आंखें नम थीं। सबके दिलों में सिर्फ भल्ला साहब की यादें और उनकी हंसी गूंज रही थी। पंजाबी सिनेमा के इस अनमोल सितारे के लिए कलाकारों का प्यार और सम्मान हर चेहरे पर साफ दिखाई दे रहा था। भल्ला को विदाई देने के लिए पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री और संगीत जगत के लगभग सभी बड़े नाम उपस्थित रहे। नीरू बाजवा, गिप्पी ग्रेवाल, एमी विर्क, बीनू ढिल्लों, हंसराज हंस, जिम्मी शेरगिल, करमजीत अनमोल, तानिया, अमर नूरी, मनकीरत औलख, जगजीत संधू, निमरत खैरा, इंदर चाहल, समीप कंग, रेशम सिंह अनमोल, सचिन अहुजा, योगराज सिंह, बनिंन्दर बनी, गुरमुख गिन्नी, गुरकिरपाल सूरापुरी, और कई अन्य सितारे उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंचे। राजनीतिक हस्तियों में कैबिनेट मंत्री तरुणप्रीत सिंह सौंध, विधायक गज्जन माजरा, सांसद तन्मनजीत सिंह ढेसी, सुनील जाखड़, बलबीर सिंह सिद्धू, दलजीत चीमा, मोहाली मेयर अमरजीत सिंह जीती सिद्धू, डिप्टी मेयर कुलजीत सिंह बेदी, नगर निगम कमिश्नर परमिंदर पाल सिंह समेत कई नेता मौजूद रहे।
कोट-
1. जसविंदर भल्ला सिर्फ एक कलाकार नहीं, बल्कि पंजाबी संस्कृति के दूत थे। भल्ला जी ने चाचा चतरा जैसे किरदारों से पीढ़ियों को हंसाया। वह आने वाले समय में विभाग की ओर से सम्मानित किए जाएंगे। - तरुणप्रीत सिंह सौंद, कैबिनेट मंत्री
2. भल्ला हमेशा यूनिवर्सिटी का गौरव रहेंगे। भल्ला ने पीएयू से पढ़ाई की और बाद में वहीं अध्यापक के तौर पर भी सेवाएं दीं। आज भले ही वे हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी रचनात्मकता और व्यंग्य हमेशा जिंदा रहेंगे। - सतबीर सिंह गोसल, कुलपति, पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी (पीएयू)
3. जसविंदर भल्ला की कमी कभी पूरी नहीं हो सकती। वे एक साथ शिक्षक, कलाकार और समाजसेवी थे। उनका जाना पंजाब और पंजाबी संस्कृति के लिए भारी क्षति है। -कोमल मित्तल, डिप्टी कमिश्नर, मोहाली
4. जब यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर लगे थे, तब से लेकर एक लंबा समय उनके साथ गुजारा। बाहर भी गए कनाडा, इंग्लैंड गए लंबे टूर किए। बेटे युवराज और नवराज के साथ कई फिल्में की। बेटे नवराज के साथ हाल जानने के लिए आए थे। लगता था करिश्मा हो जाएगा, ठीक हो जाएंगे। - हंसराज हंस, कलाकार एवं पूर्व सांसद
5. मुझे जसविंदर भल्ला साहब का बहुत आसरा था। उनके जाने से मैंने अपनी जिंदगी का बहुत बड़ा रिश्ता खो दिया है। वो सब कुछ भूल जाते थे, लेकिन मेरी छोटी-छोटी बातें भी याद रखते थे। हमें हमेशा लगता था कि अगर वो हैं, तो सब कुछ मुमकिन है। अक्सर कहते थे- जब मैं मरूं तो लोग रोएं नहीं, हंसते-हंसते विदा करें। -नीलू शर्मा, अभिनेत्री
5. हम करीब 30-35 साल एक साथ रहे। अनगिनत फिल्में साथ में कीं। जवानी से लेकर अब तक कई फिल्मों में मैं हीरो होता था और वो कॉमेडियन। उन्हीं फिल्मों में से एक का सीन हमने अमेरिका में शूट किया था। उस समय मैं क्लीन शेव हुआ करता था। हम एक ही होटल में करीब एक महीने तक ठहरे थे। शनिवार और रविवार को शो होते थे, बाकी दिनों में शूटिंग चलती रहती थी। लेकिन अफसोस… हम सबमें से सबसे पहले वही चला गया। - योगराज सिंह, अभिनेता
6. पंजाब की फिल्म इंडस्ट्री को बहुत बड़ा नुकसान हुआ है। उनके जैसा फनकार दोबारा मिलना नामुमकिन है। उन्होंने इतनी सुपरहिट फिल्में दी हैं कि गिनना मुश्किल है। कभी सोचा भी नहीं था कि वह इतनी जल्दी चले जाएंगे। मैं अपने दादाजी के साथ उनका ‘छनकाटा’ सुना करता था। वह हमेशा हमारे दिलों में जिंदा रहेंगे। - मनकीरत औलख, गायक
7. जिंदगी को देखने का उनका नजरिया बिल्कुल अलग था। दुख को भी वो पंच लाइन में बदल देते थे। ‘गड्डी जांदी ए छलांगा मारदी’ में उनके साथ लंबा सीन किया था। भल्ला साहब के सामने स्क्रीन शेयर करना अपने आप में बड़ा अनुभव था। उनके साथ खड़ा कोई भी कलाकार बेहतरीन अभिनय कर सकता था। - गुरमुख गिन्नी, कलाकार
कॉमेडी की दुनिया में अलग मुकाम
लुधियाना के दोराहा कस्बे में 4 मई 1960 को जन्मे भल्ला ने अपने करियर की शुरुआत कॉलेज कार्यक्रमों में कॉमेडी से की थी। 1988 में ‘छनकाटा’ सीरीज़ से उन्हें अपार लोकप्रियता मिली।
खास बात यह है कि अभिनय के साथ-साथ वे खेतों और शिक्षा से भी जुड़े रहे। उन्होंने कृषि विस्तार शिक्षा में पीएचडी की और पंजाब कृषि विश्वविद्यालय में प्रोफेसर के तौर पर लंबा समय बिताया।
खास बात यह है कि अभिनय के साथ-साथ वे खेतों और शिक्षा से भी जुड़े रहे। उन्होंने कृषि विस्तार शिक्षा में पीएचडी की और पंजाब कृषि विश्वविद्यालय में प्रोफेसर के तौर पर लंबा समय बिताया।
कॉमेडी की दो तिकड़ियां – पुराने दौर से नए दौर तक
लुधियाना के दोराहा कस्बे में 4 मई 1960 को जन्मे जसविंदर भल्ला को असली पहचान 1988 में शुरू हुई ‘छनकाटा’ सीरीज़ से मिली। उस दौर में उनकी तिकड़ी – भल्ला, बाल मुकुंद शर्मा और नीलू शर्मा – हर घर की पहचान बन गई थी। चाचा चतरा, नंदोई, और अन्य किरदारों ने पंजाब की गलियों से लेकर विश्वविद्यालयों के मंच तक हंसी बिखेरी।
बाद के दौर में फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखते हुए भल्ला ने नई तिकड़ी बनाई – गिप्पी ग्रेवाल और बीनू ढिल्लों के साथ। इस तिकड़ी ने कैरी ऑन जट्टा, लक्की दी अनलकी स्टोरी, बेस्ट ऑफ लक, मर गए ओए लोको जैसी फिल्मों से दर्शकों को ठहाकों पर मजबूर कर दिया। पुराने दौर की तिकड़ी ने रेडियो और कैसेट्स पर हंसी बांटी, तो नई तिकड़ी ने बड़े पर्दे पर पंजाब और विदेशों में बसे पंजाबी दर्शकों तक उनकी कॉमेडी पहुंचाई।