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सूचना मंत्रायल ने आरटीआई का जवाब न देने पर गमाडा को लगाई फटकार

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मोहाली। दो साल तक आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी न देने पर राज्य सूचना आयोग ने गमाडा को फटकार लगाई है। आयोग ने सख्त लहजे में कहा है कि गमाडा में आरटीआई एक्ट का पालन नहीं किया जा रहा है। वीआईपी सिटी में भूमि के दुरुपयोग (लैंड मिसयूज) की जानकारी आरटीआई के तहत मांगी गई थी। आयोग ने गमाडा के सीए को मामले की जांच कर रिपोर्ट तैयार करने को कहा है।
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दो साल पहले मोहाली एनवायरमेंट सोसाइटी के प्रधान केएनएस सोढी ने गमाडा से लैंड मिसयूज संबंधी जानकारी मांगी थी। आरटीआई एक्ट के तहत 30 दिन में जानकारी मिलनी चाहिए थी, जो दो साल बाद भी मुहैया नहीं करवाई गई है। सोढी मामले को लेकर राज्य सूचना आयोग पहुंचे। तीन बार आयोग के निर्देशों के बावजूद गमाडा ने न तो सूचना उपलब्ध करवाई और न ही गमाडा का कोई प्रतिनिधि आयोग के समक्ष पेश हुआ। आयोग ने गामाडा के इस बर्ताव पर हैरानी जताते हुए अपनी टिप्पणी में कहा है कि गमाडा में आरटीआई एक्ट का पालन नहीं हो रहा है।
सोढी का कहना है कि सेक्टर-70 में भूमि का दुरुपयोग को रहा है। सामाजिक संस्थाओं व चैरिटेबल ट्रस्ट के नाम पर गमाडा से सस्ते दामों पर जमीन आवंटित करवाई गई है। अकेले सेक्टर-70 में ही 20 से 25 संपत्तियां हैं जिनका इस्तेमाल निजी व व्यावसायिक तौर पर हो रहा है, जोकि गमाडा के नियमों के खिलाफ है। उन्होंने ऐसी ही संपत्तियों का विवरण मांगा था, जिसे गमाडा की ओर से उपलब्ध नहीं करवाया गया।
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राज्य सूचना आयोग ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए गमाडा से जवाब मांगा है। इसके अलावा सूचना न दिए जाने को कर्मचारियों की लापरवाही मानते हुए संबंधित कर्मचारियों व अधिकारियों से जवाब तलब कर आयोग के समक्ष 21 जून को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए प्रस्तुत होने के निर्देश भी दिए हैं। इसके साथ ही आयोग ने 15 दिन के भीतर सूचना उपलब्ध करवाने के लिए भी गमाडा को कहा है।
सस्ती जमीन आवंटन की सुविधा देता है गमाडा
सामाजिक कार्यों के लिए संस्थानों व चैरिटेबल ट्रस्टों को सस्ते दामों में जमीन आवंटित करने की सुविधा गमाडा देता है। इस आवंटित जमीन को न तो बेचा जा सकता है, न ही इसके इस्तेमाल को बदला जा सकता है। इन जमीनों को किसी निजी नाम पर भी हस्तांतरित नहीं किया जा सकता है। गमाडा के पास यह अधिकार है कि अगर इस तरह आवंटित जमीन का इस्तेमाल किसी अन्य काम के लिए हो रहा हो तो उसका आवंटन रद्द कर दे। सोढी का कहना है कि शहर में समाजसेवा के नाम पर सस्ते में आवंटित हुई जमीन का निजी व व्यवसायिक इस्तेमाल हो रहा है।
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