मोहाली। जिले के पशुपालक इस समय काफी मुश्किल में आ गए हैं। तूड़ी पर महंगाई की मार पड़ गई है। तूड़ी के प्रति क्विंटल दाम 1200 रुपये पार कर गए हैं। इतना ही नहीं तूड़ी की कालाबाजारी भी हो रही है। यह आरोप रविवार को ट्राइसिटी में दूध सप्लाई करने वाले पेरीफेरी मिल्कमैन यूनियन के सदस्यों ने लगाया। उन्होंने राज्य के मुख्यमंत्री भगंवत मान को इस संबंध में पत्र लिखा है।
उन्होंने यह भी मांग की है कि हरियाणा सरकार की तर्ज पर तूड़ी को अन्य राज्यों में जाकर बेचने पर पाबंदी लगाई जाए ताकि दूध उत्पादकों व पशु पालकों को बर्बाद होने से बचाया जा सकें। वरना उनके पास पशु लावारिस छोड़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं रह जाएगा।
फेज-आठ स्थित गुरुद्वारा अंब साहिब में पेरीफेरी मिल्कमैन यूनियन की एक आपात बैठक संरक्षक हाकम सिंह मनाणा, परमजीत सिंह, जसमेर गिरि व बलजीत सिंह की अगुवाई में हुई। इसमें ट्राइसिटी के दूध विक्रेताओं ने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया। इस मौके सदस्यों की दलील थी कि इस समय तूड़ी सीजन चल रहा है लेकिन इसके बावजूद तूड़ी की दिक्कत बनी हुई है। तूड़ी आज तक के सबसे ऊंचे दाम 1200 प्रति क्विंटल के हिसाब से बिक रही है। दामों में दोगुना की बढ़ोतरी हो गई है। पहले यह 600 से 700 रुपये तक में मिल जाती थी। दूध उत्पादकों का आरोप है कि गत्ता फैक्टरी, हिमाचल में चलने वाले निजी कंपनियां किसानों को तूड़ी का मुंहमांगा दाम दे रही हैं। ऐसे में उक्त लोग स्थानीय सप्लाई देने के बजाय वहां पर तूड़ी की सप्लाई कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि यदि इस दिशा में इस समय कदम नहीं उठाया गया तो आने वाले समय में हालत और खराब हो जाएंगे। इसके अलावा फीड से लेकर अन्य चीजें पहले ही महंगी चल रही है। मोहाली जिले में दस हजार से अधिक लोगों के पास पशु हैं। यहां पर पूरे पंजाब की करीब पौने दो फीसदी आबादी खेती करती है। इस मौके पर सुखविंदर सिंह, सतबीर सिंह, गुरमुख सिंह, स्वर्ण सिंह, तीर्थ राम, कुलबीर सिंह, हिम्मत सिंह, गुरविंदर सिंह, नरिंदर सिंह, परमजीत सिंह, अमरीक सिंह, जगजीत सिंह जग्गी, जगतार सिंह, परमिंदर सिंह, दविदंर सिंह हाजिर थे।
गोशाला चलाने वाले लोग भी दिक्कत में
तूड़ी के ऊंचे दामों की वजह से केवल पशु पालक ही नहीं बल्कि गोशालाएं चलाने वाले प्रबंधक भी परेशानी में हैं। कुछ समय पहले इसी मामले को लेकर गो ग्रास सेवा समिति के सदस्यों ने डीसी अमित तलवार से मुुलाकात की थी। उन्होंने डीसी से तूड़ी के दामों पर अंकुश लगाने की दिशा में कार्रवाई करने की गुहार लगाते कहा था कि गोशालाएं दान से मिलने वाले पैसे से चलती हैं लेकिन जिस तेजी से दाम बढ़ रहे हैं उससे संस्थाएं भी दिक्कत में आ गई हैं।