मोहाली। इंडस्ट्रियल एरिया फेज-8ए और बी शहर के अन्य कामर्शियल इलाकों में सबसे ज्यादा टैक्स देता है। इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि सबसे ज्यादा टैक्स देने वाले इंडस्ट्रियल एरिया में साफ-सफाई और अन्य जरूरी सुविधाएं भी ज्यादा ही होंगी। लेकिन यहां आकर संवाद की टीम ने देखा तो ऐसा कुछ नहीं था। यहां पहुंचने पर देखा तो बड़ी-बड़ी आसमान छूती सुंदर इमारतें तो नजर आईं। लेकिन जमीन पर नजर गई तो जगह-जगह कचरे के ढेर लगे हुए हैं और सड़कें जगह-जगह से टूटकर खराब हो चुकी हैं। दूसरी जगह पर सीवरेज के लिए अंडरग्राउंड पाइप लाइन डाली जा रही है। इस वजह से जगह-जगह सड़कें आपको खुदी हुई मिल जाएंगी। कई कंपनियों की इमारत जो बन रही है या जिनकी मरम्मत हो रही है, उनसे निकले वाले मलबे के पहाड़ मिल जाएंगे। यहां की सड़कों की काफी समय से मरम्मत नहीं हुई है। इस बात से आप इसका अंदाजा लगा सकते हैं कि इस एरिया में दाखिल होते ही आपके वाहन हिचकोले खाने लगेंगे। बारिश में भर जाता है पानी बारसात के मौसम में तो इस एरिया की स्थित दयनीय हो जाती है। जगह-जगह पानी भर जाता है, क्योंकि ड्रेनेज चैंबर की सफाई नहीं होती, कही-कही तो ड्रेनेज चैंबर खुले या टूटे पड़े है। इस खुले पड़े ड्रेनेज चैंबर से कभी भी कोई हादसा यहां हो सकता है। किसी के वाहन को नुकसान हो सकता है तो कोई व्यक्ति यहां गिर सकता है। खाली प्लॉट्स और इमारतों में घास और झाड़ियां उग रही है। ऐसे में यहां सांप जैसे जीव शरण ले सकते हैं। ये कहीं भी दाखिल होकर किसी को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं।
निवेश करने से कतराएंगी विदेशी कंपनियां
इस इंडस्ट्रियल एरिया से छह किलोमीटर की दूरी पर आईएसबी (इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस) स्थित है। यहां पर कुछ समय पहले पंजाब इन्वेस्टर्स समिट कार्यक्रम आयोजित हुआ था। अगर इसमें शामिल हुए विदेशी मेहमान पंजाब में एनवेस्ट करेंगे और अपना बिजनेस स्थापित करेंगे। तो ऐसे एरिया में इन्वेस्टमेंट करने से विदेशी कंपनियां कतराएंगी। यहां के उद्योगपतियों का कहना है कि जितना यहां टैक्स दिया जाता है उतनी यहां पर सुविधाएं नहीं हैं। उन्हें यहां पैसा लगाना व्यर्थ लगता है। यहां कई ऐसी कंपनियां भी हैं जिनके नेटवर्क विदेश तक हैं। उनका कहना है कि अगर वो यहां किसी मेहमान को आमंत्रित करने से पहले भी कई बार सोचना पड़ता है क्योंकि जिन सड़कों से विदेशी मेहमान आएंगे वह टूटकर खराब हो चुकी हैं। जगह-जगह कचरे के ढेर लगे हैं और खुदी हुई सड़के, ड्रेनेज खुले पड़े हैं। इन समस्याओं से रोजाना उन्हें दो-चार होना पड़ता है।
रात का समय महिलाओं के लिए नहीं सुरक्षित
यहां पर रात के समय यहां रास्ते अक्सर सुनसान रहते हैं। यहां ऑफिस में काम करने वाली महिलाएं बताती हैं कि ऑफिस में कभी काम की वजह से देरी भी हो जाए तो रात में यहां से अकेले जाना सुरक्षित नहीं है। रास्ता काफी सुनसान होता हैं, कोई ट्रांसपोर्ट की सुविधा यहां उपलब्ध नहीं है। कई रास्तों पर तो रात के समय स्ट्रीट लाइट्स भी नहीं जलती।