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जिस गांव में बसेगा आधुनिक शहर, वहां के लोगों में टीकाकरण को लेकर रुझान फीका

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मोहाली। ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (गमाडा) जिस गांव की जमीन पर एयरोट्रोपोलिस का कुछ हिस्सा बसाने जा रहा है। उस गांव के लोगों में टीकाकरण को लेकर उत्साह रुझान थोड़ा कम है। जी हां, गांव सिआऊं की जनसंख्या करीब 600 है। इनमें से ही अब तक कुल मिलाकर 300 लोगों ने टीकाकरण करवाया हैं। हालांकि गांव की पंचायत और सेहत विभाग अपने स्तर पर प्रयास कर रहा है। इतना ही नहीं गांव की पंचायत के सदस्यों ने टीकाकरण को गति देने केे लिए खुद और अपने पारिवारिक सदस्यों का टीकाकरण करवा दिया था, लेकिन इसके बाद भी टीकाकरण की रफ्तार धीमी चल रही है।
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बांकरपुर की एएनएम वर्कर ने बताया कि गांव सिआऊं के लोग बाकरपुर डिस्पेंसरी में ही इलाज करवाने के लिए आते हैं। कुल 100 लोगों ने बाकरपुर डिस्पेंसरी में टीकाकरण कराया। जिसमें बुजुर्ग से लेकर युवक तक शामिल थे। मई महीने में सिआऊं में कुल पांच-छह परिवार संक्रमित हुए। इस कारण दो लोगों की कोरोना से मौत भी हुई, लेकिन इन सबके बावजूद पढ़े लिखे लोग वैक्सीन लगवाना ही नहीं चाहते। एएनएम ने बताया कि कोरोना से एक मृत्यु होने के बाद स्वास्थ्य मंत्री के कहने पर इस गांव में खास तौर पर टीकाकरण शिविर लगवाया गया। जिसमें सिर्फ 40 लोगों ने ही टीका लगवाया। इसके बाद गांव में तीन बार शिविर लगा है। लेकिन दो बार हमें किसी को टीका लगाए बिना लौटना पड़ा। वहीं चौथे शिविर के दौरान सरपंच ने घर-घर संदेश भेजकर लोगों को बुलाया। जिसके बाद 70 लोगों ने टीका लगवाया। वहीं अब तक कुल मिलाकर करीब 300 लोगों का टीकाकरण हो चुका है।
खुद परिवार सहित करवाया टीकाकरण
वहीं, अप्रैल के अंत में जब दूसरी लहर अपने चरम पर थी तो उस दौरान गांव सिआऊं में कोरोना की दस्तक हुई थी। गांव के लोगों ने खुद को घरों के अंदर बंद कर लिया। गांव के लोगों को हिदायत दी गई कि वे एक दूूसरे के घरों में न जाएं ताकि संक्रमण को रोका जाए। इसी बीच कोरोना टीकाकरण के शुरुआत हुई। मैंने अपने परिवार सहित गांव के शिविर में जाकर टीकाकरण करवाया। जबकि मेरे माता-पिता की उम्र 70 वर्ष के आसपास है। उन्हें टीका लगवाने के बाद कोई समस्या नहीं आई। उन्होंने बताया मैंने जब टीका लगवाया तो मुझे देखकर गांव के 80-90 लोगों ने टीका लगवा लिया।
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- मंगल सिंह गांव के सरपंच
पंचायत टीकाकरण के लिए कर रही प्रयास
गांव में ज्यादातर लोग किसान हैं, वहीं कुछ ऐसे परिवार हैं जो दूध का कारोबार करने शहर जाते हैं। ऐसे में शहर से संक्रमण गांव में आना स्वाभाविक था। कोरोना की जांच के बाद पता चला कि गांव से करीब एक दर्जन लोग संक्रमित हैं। ऐसे में बांकरपुर के स्वास्थ्य कर्मियों की सहायता ली गई और उन परिवारों के लिए दवा का बंदोबस्त करवाया गया। वहीं उन्हीं परिवारों में से एक परिवार के एक बुजुर्ग की मृत्यु हो गई। उन्हें कोरोना नहीं था। लेकिन उम्र ज्यादा होने से उनकी मौत हुई । इन सब के बावजूद परिवारों को कहा गया कि वे कैंप में आकर वैक्सीन लगवाएं। जिसके बावजूद भी परिवारों ने कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई।
- हरचंद सिंह गांव के नौजवान पंच
टीकाकरण में विश्वास रखने वाले लगवा रहे हैं टीका
टीवी पर आने वाली खबरों से लोग काफी प्रभावित हुए, आज कल हर घर में स्मार्ट फोन है। कोरोना वैक्सीन पर हर खबर गांव में पहुंच जाती है ऐसे में जब दूसरी लहर के कारण लोग तड़प रहे थे, इस बीच गांव के लोगों ने बीमार होने के बावजूद घर में ही देसी इलाज से खुद को ठीक किया। वहीं गांव में जिनकी मौत हुई है वे या तो अधिक बुजुर्ग थे या उन्हें कोई ओर बीमारी थी। जिन्हें टीकाकरण पर विश्वास था वह पहले ही जाकर सरकारी या निजी अस्पतालों में टीका लगवा चुके हैं। मैंने भी बांकरपुर जाकर टीका लगवाया है और मैं ठीक हूं।
- गुरध्यान सिंह, गांव निवासी
लोगों की मौत के बाद से टीके पर विश्वास नहीं रहा
गांव में काफी पढ़े लिखे लोग हैं। जिनमें से 6 घर के लोग तो पंजाब सरकार में नौकरी करते हैं। इसके बावजूद भी वे वैक्सीन लेना नहीं चाहते। इसकी वजह है गांव का माहौल। यहां ज्यादातर परिवार खेती बाड़ी से संबंध रखते हैं जिन्हें गांव से बाहर जाना ही नहीं पड़ता। वहीं जिन दो लोगों की कोरोना से मौत हुई है, उनमें से एक ने वैक्सीन लगवाई हुई थी। ऐसे में लोगों को टीकाकरण पर विश्वास नहीं हो रहा।
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- गुरविंदर सिंह, गांव निवासी
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