शहर में सालों से चली आ रही लावारिस पशुओं की समस्या जल्दी ही दूर होने वाली है। नगर काउंसिल द्वारा बनाई जा रही गौशाला का काम आखिरी चरण में पहुंच गया है।
उम्मीद है कि अगले चार दिनों में काम पूरा हो जाएगा। नगर निगम ने पहले ही तय कर दिया है कि गौशाला का संचालन एवं पशुओं की देखभाल का जिम्मा समाजसेवी संस्था को सौंपा जाएगा।
नगर निगम द्वारा इंडस्ट्रियल एरिया फेज-1 में गौशाला बनाई जा रही है। दो एकड़ में बन रही गौशाला में 350 पशुओं की रखने की क्षमता होगी। पशुओं की देखभाल में किसी भी प्रकार की समस्या न आए।
इसके लिए गौशाला में तीन ब्लाक बनाए गए हैं। तीनों ब्लॉकों में बराबर गिनती में पशुओं को रखा जाएगा। पशुओं को घास के लिए खुरलियां एवं पानी के लिए तीन हिस्सों में टैंक बना दिए गए हैं।
इसके अलावा सेनेटरी काम पूरा कर लिया गया है। गौशाला में सफाई का पूरा इंतजाम रहेगा। इसलिए पानी एवं गौमूत्र की निकासी के लिए विशेष नालियां एवं टाइल लगाई जा रही हैं। इसके अलावा तूड़ी एवं अन्य सामान रखने के लिए अलग से शेड बनाने का काम चल रहा है।
सात को सौंपी जाएगी संचालन की जिम्मेदारी
नगर निगम ने गौशाला के संचालन की जिम्मेदारी समाजसेवी संस्थाओं को सौंपने का फैसला लिया है। इसके लिए विभिन्न समाजसेवी संस्थाओं से आवेदन मांगे गए हैं।
सात अक्तूबर को नगर निगम विभिन्न समाजसेवी संस्थाओं से आए आवेदनों को चेक करेगी। इस दौरान जो संस्था नगर निगम के पैरामीटर पर खरी उतरेगी। नगर निगम द्वारा उस संस्था को ही गौशाला की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।
लावारिस पशुओं को पकड़ने का अभियान जारी
नगर निगम द्वारा लावारिस पशुओं को पकड़ने का अभियान जारी है। एक महीने में डेढ़ सौ करीब पशु पकड़े गए हैं। एक लाख रुपये के करीब जुर्माना राशि भी नगर निगम के खाते में आ चुकी है। यह पहला मौका है जब नगर निगम की टीम ने लावारिस पशु पकड़ने के जिए जो जुर्माना राशि का टारगेट रखा है, उसे साल खत्म होने से पहले ही पूरा कर लिया है।