जीरकपुर। अदालत के निर्देशों पर रेवेन्यू विभाग ने पुलिस की मदद से गांव दयालपुरा की एक विवादित जमीन (13 बीघे 7 मरले) पर किया गया कब्जा खाली करवाया और दावेदारी जताने वाले रामलाल के बेटे गुरबचन सिंह को इसका कब्जा दिला दिया। हालांकि इस जमीन पर दूसरे पक्ष का नोनिहाल सोढी परिवार भी अपनी दावेदारी जता रहा है कि उनका करीब 40 साल से कब्जा था।
सोढी परिवार का आरोप है कि रामलाल के बेटे गुरबचन लाल ने सरकारी अधिकारियों की मदद से अदालत को गुमराह कर जाली दस्तावेज दिखाकर फैसला अपने हक में करवाया है। पुलिस ने कब्जा दिलाने से पहले जमीन के किसी मालिक को इसकी जानकारी भी नहीं दी। सोढ़ी परिवार ने सीबीआई जांच की मांग की है। शनिवार को नोनिहाल सोढी ने एक प्रेस कांफ्रेंस करके गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि दयालपुरा की इस 26 बीघे 10 बिसवे जमीन का सौदा उनके पिता अमरजीत सोढ़ी ने 18 अक्तूबर, 1977 को बसेशर सिंह से किया था। इस सौदे के दो महीने बाद उसके पिता की सड़क हादसे में मौत हो गई। इसके बाद वर्ष 1978 में 26 बीघे 10 बिसवे जमीन में से 12 बीघे 15 बिसवे जमीन उनकी पत्नी और बच्चों के नाम हो गई थी। इस जमीन के सौदे में 13 बीघे 15 बिसवे जमीन पर पांच हजार रुपये बतौर बयाना दिया जा चुका था, जोकि रजिस्ट्री में भी दर्ज है। कुछ दिन बाद जमीन मालिक बसेशर सिंह की भी मौत हो गई थी। इसका फायदा गांव दयालपुरा निवासी रामलाल और उसके बेटे गुरबचन लाल ने उठाया। दोनों बाप-बेटे ने मृतक बसेशर सिंह की जमीन के जाली हस्ताक्षर करके रजिस्ट्री अपने नाम करवा ली। इसमें उन्होंने जमीन की कीमत 46725 रुपये दिखाकर बसेशर सिंह को दी गई दिखाई है।
वहीं रामलाल के साथ जाली हस्ताक्षर और दस्तावेज तैयार करने में गांव दयालपुरा के शिवचरण शर्मा, मानक चंद, वलेती राम, कुलदीप कुमार डीड राइडर राजपुरा, बालक राम नंबरदार मुबारकपुर ने उनका साथ दिया है। सोढी ने आरोप लगाया है कि रामलाल रेवेन्यू विभाग के बड़े अधिकारी का ड्राइवर था। इस कारण एक दिन में रजिस्ट्री करवाकर दूसरे दिन इंतकाल करवा लिया था।
अब नोनिहाल सोढी ने इस मामले में सीबीआई जांच की मांग की है।
कोट्स
हमने तो अदालत के आदेश का पालन किया है। हमें अदालत की ओर से कब्जा करवाने के निर्देश दिए गए थे। इस केस में जितने भी लोग शामिल थे सबको परवाना भेजा गया है। नोनिहाल सोढी के घर भी परवाना भेजा था और मेरी नोनिहाल सोढी से फोन पर बात भी हुई है। हमने जो भी किया है कानून के दायरे में रहकर ही किया है। -कुलदीप सिंह, कनूनगो जीरकपुर।