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Mohali News: एचपीवी वैक्सीन से मिल सकती है सर्वाइकल कैंसर से समय रहते सुरक्षा

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मोहाली। एचपीवी एक ऐसा वायरस है जो बिना किसी स्पष्ट लक्षण के शरीर में प्रवेश कर जाता है, वर्षों बाद सर्वाइकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का कारण बन सकता है। इससे समय रहते बचाव के लिए एचपीवी वैक्सीन एक प्रभावी और सुरक्षित उपाय है। स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. जपलीन कौर का कहना है कि ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) मुख्य रूप से यौन संपर्क से फैलता है, लेकिन कुछ मामलों में त्वचा के सामान्य संपर्क से भी संक्रमण हो सकता है। यह वायरस महिलाओं में सर्वाइकल और वल्वा के कैंसर के साथ-साथ पुरुषों में गले और जननांगों से संबंधित कई तरह के कैंसर का कारण बन सकता है। साथ ही यह जेनिटल वॉर्ट्स जैसी बीमारियों के लिए भी जिम्मेदार है।
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कौन ले सकता है एचपीवी वैक्सीन?
- वैक्सीन उम्र के अनुसार अलग-अलग डोज में दी जाती है।
- 9 से 14 वर्ष की किशोरियों के लिए : 2 डोज (0 और 6–12 माह पर)
- 15 से 26 वर्ष के युवाओं के लिए : 3 डोज (0, 1–2 और 6 माह पर)
- पुरुषों को भी वैक्सीन दी जा सकती है

- 27 से 45 वर्ष के वयस्कों के लिए : वैक्सीन एफडीए द्वारा मंजूर है, लेकिन यह सभी को नियमित रूप से नहीं दी जाती


वैक्सीन कितनी असरदार

एचपीवी वैक्सीन 99% तक प्रभावी है, जब इसे सही उम्र में और समय पर लगाया जाए। क्वाड्रिवलेंट वैक्सीन लगभग 70% प्रभावी है। नोनावलेंट वैक्सीन लगभग 90% तक असरदार मानी जाती है। टीके के बाद हल्का दर्द, सूजन या लालिमा जैसे हल्के लक्षण आ सकते हैं जो सामान्य हैं और एक-दो दिन में ठीक हो जाते हैं।
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कई माता-पिता यह सोचकर वैक्सीन नहीं लगवाते कि इससे उनके बच्चे गलत दिशा में जा सकते हैं या जल्द यौन सक्रिय हो सकते हैं। लेकिन उन्होंने साफ किया कि एचपीवी वैक्सीन किशोरों के व्यवहार पर कोई नकारात्मक असर नहीं डालती। यह सिर्फ एक स्वास्थ्य सुरक्षा उपाय है, जो भविष्य की गंभीर बीमारियों से उन्हें बचाता है।
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माता-पिता के लिए संदेश

बेटियों और बेटों दोनों को 9 से 14 साल की उम्र में एचपीवी वैक्सीन जरूर दिलवाएं। यह उम्र टीकाकरण के लिए सबसे उपयुक्त है। इससे शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक मजबूत बनती है। यह सिर्फ एक टीका नहीं, बल्कि आने वाले समय में कैंसर जैसे गंभीर खतरे से बच्चों को सुरक्षित रखने का जरिया है।
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