चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने मध्यस्थता अधिनियम, 2023 के तहत सामुदायिक मध्यस्थता से जुड़े प्रावधानों की अधिसूचना अब तक जारी न होने पर कड़ी नाराजगी जताई है। हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिए हैं कि वह 60 दिनों के भीतर इन प्रावधानों को अधिसूचित करे। अदालत ने इस मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए केंद्र सरकार के साथ-साथ पंजाब, हरियाणा और केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ को भी पक्षकार बनाया है।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि मध्यस्थता अधिनियम-2023 का अध्याय-10, जो सामुदायिक मध्यस्थता से संबंधित है, अब तक लागू नहीं किया गया है जबकि इस अध्याय की धाराएं 43 और 44 समाज में छोटे स्तर के विवादों के समाधान के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। अदालत ने कहा कि प्रत्येक समाज में पड़ोस, परिवार या समुदाय स्तर पर ऐसे विवाद होते हैं जिनका समाधान अदालतों के बजाय सामुदायिक मध्यस्थता के माध्यम से प्रभावी ढंग से किया जा सकता है।
अदालत ने टिप्पणी की कि सामुदायिक मध्यस्थता कार्यक्रम जमीनी स्तर पर संघर्षों को सुलझाने में मददगार साबित हो सकते हैं और इससे सामाजिक सद्भाव व शांति को बढ़ावा मिलता है। ग्रामीण क्षेत्रों में खाप पंचायतें अपने-अपने समुदायों में सामाजिक प्रभाव रखती हैं और एक प्रकार का सामाजिक शासन भी चलाती हैं, ऐसे में सामुदायिक मध्यस्थता का औपचारिक ढांचा बेहद उपयोगी हो सकता है। हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि सामुदायिक मध्यस्थता न केवल सस्ता और त्वरित समाधान प्रदान करती है बल्कि इससे न्यायिक व्यवस्था पर बोझ भी कम किया जा सकता है। इसके बावजूद केंद्र सरकार द्वारा इन प्रावधानों को लागू न किया जाना गंभीर चिंता का विषय है। अदालत ने केंद्र को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि तय समयसीमा के भीतर अधिसूचना जारी कर इसकी जानकारी अदालत को दी जाए।