कुराली। पश्चिमी बंगाल के कोलकाता में एनकाउंटर मेें मारे गए गैंगस्टर जयपाल भुल्लर और जसप्रीत सिंह जस्सी के एक साथी भरत कुमार निवासी लुधियाना साहनेवाल को पुलिस ने शंभू बैरियर के पास से गिरफ्तार किया है। उसके पास से 30 बोर की पिस्तौल भी बरामद की है।
आरोप है कि उसने ही आरोपियों को कोलकाता तक पहुंचने में मदद की। इतना ही नहीं आरोपियों को वहां पर फ्लैट दिलाने के लिए जाली दस्तावेज भी तैयार कर उसने ही दिए थे। आरोपी को वीरवार को खरड़ की अदालत में पेश किया गया। पुलिस ने आरोपी का रिमांड लेने के लिए कई तर्क दिए, इसके बाद अदालत ने उसे सात दिन के रिमांड पर भेज दिया है।
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक जगराओ में पुलिस मुलाजिमों की हत्या के बाद से ही पुलिस गैंगस्टर जयपाल भुल्लर और उसके साथियों की तलाश में थी। पुलिस की टीमें उन सभी राज्यों में दस्तक दे रही थीं, जहां पर आरोपियों के छिपे होने का अंदेशा था। इसी बीच बुधवार की सुबह पुलिस की टीम ने शंभू बैरियर से आरोपी भरत कुमार को दबोच लिया। उससे पूछताछ में अहम जानकारियां पुलिस के हाथ लगी थी। जिसके बाद पहले से पश्चिमी बंगाल में मौजूद पंजाब पुलिस की टीम के साथ जानकारियां शेयर की गई। इसके बाद पुलिस ने उस फ्लैट में दबिश दी। आरोपियों को सरेंडर करने के लिए कहा गया है। लेकिन उनकी ओर से इस संबंध में सरेंडर करने से मना कर दिया गया। इसके बाद हुई मुठभेड़ में दोनों गैंगस्टर की मौत हो गई।
पुलिस ऐसे लगी थी आरोपियों के पीछे
पुलिस सूत्रों के मुताबिक कोविड काल में पुलिस मुलाजिमों की हत्या के बाद आरोपी पश्चिमी बंगाल के लिए रवाना हो गए थे। इसी दौरान पुलिस को एक होंडा एकार्ड कार से एक लीड मिली थी, इसके आधार पर पुलिस उनके पीछे लग गई थी। आगरा टोल प्लाजा पर गाड़ी सीसीटीवी कैमरे में कैद भी हुई थी। यह बंगाल नंबर की कार थी। पुलिस सूत्रों की मानें तो यह कार भरत कुमार थी और कार के आगे पुलिस का स्टिकर लगा हुआ था। इसके पीछे आरोपियों की कोशिश थी कि उन्हें कोई किसी जगह पर रोकेगा नहीं और न ही कोई आसानी से उनका पीछा करेगा।
गिरगिट की तरह रंग बदलता था गैंगस्टर
पुलिस की जांच में सामने आया है कि गैंगस्टर जयपाल भुल्लर अपनी पहचान छुपाने में काफी माहिर था। वह गिरगिट की तरह रंग बदलकर हर शहर में नए गेटअप में नजर आता था। वह हर समय वह अपने पास एक लैपटॉप और कलर प्रिंटर रखता था। किसी भी इलाके में जाकर वह अपने फर्जी दस्तावेज तैयार कर लेता था। इतना ही नहीं वह जब भी किसी से मिलता और बातचीत करता तो अपने बारे में ज्यादा जानकारी शेयर नहीं करता था। जयपाल के अधिकतर साथी पकड़े जा चुके थे। ऐसे में जेल में बने नए दोस्तों के साथ जुटा हुआ था।