मोहाली। औद्योगिक नगरी मोहाली में छोटी और माइक्रो उद्योग की मुश्किलें बढ़ गई हैं। उद्योगपतियों के करीब 100 करोड़ रुपये के जीएसटी रिफंड लंबे समय से लंबित हैं। इससे 50 से अधिक इकाइयों का कारोबार प्रभावित हो रहा है। इनमें से कई इकाइयों को लगभग एक साल से रिफंड नहीं मिल पाया है। रिफंड की रकम कारोबार में वापस न आने से उन्हें कर्मचारियों का वेतन देने में परेशानी हो रही है। रोजमर्रा के खर्च पूरे करने में भी दिक्कतें आ रही हैं।
वीरवार को मोहाली इंडस्ट्री एसोसिएशन (एमआईए) के एक प्रतिनिधिमंडल ने जीएसटी विभाग के अधिकारियों से मुलाकात की। पूर्व मेयर अमरजीत सिंह सिद्धू और एमआईए प्रधान मुकेश बंसल ने इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया। प्रतिनिधिमंडल में दिलप्रीत सिंह बोपाराय, अनुराग अग्रवाल और बीएल गोयल जैसे उद्योगपति शामिल थे। उन्होंने उपायुक्त जीएसटी एसके गर्ग के समक्ष अपनी समस्या रखी। उद्योग प्रतिनिधियों ने लंबित मामलों की जांच और प्रक्रिया को जल्द पूरा कर रिफंड जारी करने की मांग की। एसके गर्ग ने उचित कार्रवाई और लंबित रिफंड मामलों को देखने का आश्वासन दिया। उद्योग जगत को अब जल्द ही अटकी रकम जारी होने की उम्मीद है।
नकदी प्रवाह पर असर
उद्योगपतियों ने अधिकारियों को बताया कि रिफंड की रकम छोटी इकाइयों के नकदी प्रवाह का महत्वपूर्ण हिस्सा है। करीब एक साल से रिफंड अटका होने के कारण कंपनियों की कार्यशील पूंजी प्रभावित हो रही है। इसका सीधा असर उत्पादन क्षमता पर पड़ रहा है। कच्चा माल खरीदने और कर्मचारियों को समय पर वेतन देने में भी कठिनाई आ रही है।
पांच हजार कर्मचारियों पर संकट
उद्योगपतियों का कहना है कि यदि रिफंड की समस्या जल्द दूर नहीं हुई तो इसका असर पांच हजार से अधिक कर्मचारियों पर पड़ सकता है। मोहाली के उद्योग से जुड़े इन कर्मचारियों के रोजगार पर दबाव बढ़ने की आशंका है। नकदी संकट बढ़ने से वेतन भुगतान में भी समस्या आ सकती है।