मोहाली/नयागांव। सरकारी प्राइमरी स्कूल मसौल की दशा को सुधारने के लिए स्कूल शिक्षा मंत्री हरजीत सिंह बैंस ने 50 लाख रुपये की अनुदान राशि जारी करने के हुक्म दिए हैं। उन्होंने स्कूल के विद्यार्थियों और गांववासियों को भरोसा दिया कि एक महीने में ही इस स्कूल की सूरत बदल दी जायेगी। दरअसल स्कूल शिक्षा मंत्री सरकारी स्कूल का दौरा करने पहुंचे। यहां पहुंचने पर उन्हें कई अनियमितताएं मिली जिसके बाद उन्होंने यह आदेश दिए। बता दें कि अमर उजाला ने इस इलाके के स्कूलों के बुरे हालात के बारे में कई खबरें छापी थीं।इस दौरान बैंस ने स्कूल की सफाई की शुरुआत खुद करते हुए झाड़ू लगाया और साथ ही कमरों में लगे मकड़ी के जालों को उतारा। इस काम में मनरेगा वर्करों ने भी साथ दिया। सफ़ाई के दौरान स्कूल शिक्षा मंत्री को दो डब्बा बंद कंप्यूटर भी मिले, जोकि बीते तीन साल के बिना प्रयोग के ही स्कूल में पड़े हुए थे।
इस मौके पर स्कूल के कमरों पर लिए गए अवैध कब्जे को भी छुड़वाया और एक क्लास के विद्यार्थी को यहां बिठाया गया। विद्यार्थियों के शिक्षा स्तर की जांच करने के लिए जब स्कूल शिक्षा मंत्री द्वारा विद्यार्थियों के साथ बातचीत की गई तो यह बात सामने आई कि चौथी और पांचवी कक्षा के विद्यार्थी भी पंजाबी, हिंदी और अंग्रेजी पढ़ने में असमर्थ थे। इस पर कार्रवाई करते हुए शिक्षा मंत्री ने स्कूल में लंबे समय से सेवा निभा रहे दोनों अध्यापकों को निलंबित करने और नए अध्यापक तुरंत नियुक्त करने के आदेश दिए। इस मौके पर उन्होंने कहा कि केवल स्मार्ट स्कूल का फट्टा लगाने से ही स्कूल स्मार्ट नहीं हो जाता। इस स्कूल को कांग्रेस सरकार ने स्मार्ट स्कूल का दर्जा दिया था, परंतु इस स्कूल में न तो क्लासरूम हैं, न पीने वाला पानी, न ही साफ़-सफ़ाई का कोई प्रबंध और न ही स्कूल की चारदीवारी है।