नयागांव। मुल्लांपुर न्यू चंडीगढ़ के सरकारी होमी भाभा कैंसर अस्पताल ने बुक्कल म्यूकोसा कैंसर से ग्रस्त वाराणसी के 49 वर्षीय रमेश का मुफ्त इलाज कर उसको नया जीवनदान दिया है। मरीज किसान का डॉ. साहिल मित्तल सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट, डॉ. वरुण सैनी, डॉ. सुबेंधू प्लास्टिक सर्जन की टीम ने यह सफल ऑपरेशन 12 घंटे में किया है। यह मरीज गरीब किसान रमेश है जो बुक्कल म्यूकोसा कैंसर से ग्रस्त था और चौथे चरण का मरीज था। इसलिए उसका जल्द ऑपरेशन करना जरूरी था। लेकिन पैसे न होने की वजह से वह इलाज करवाने में असमर्थ था, इसका इलाज होमी भाभा कैंसर अस्पताल ने अपनी स्पेशल एन ''सी'' केटेगिरी के तहत कर पूरा खर्चा उठाकर किया है। वहीं, अस्पताल के डायरेक्टर डॉ. आशीष गुलिया ने कहा कि उनका मुख्य उद्देश्य ही यहीं है कि कोई भी मरीज बिना इलाज के न जाए और पैसे के अभाव के चलते तो बिलकुल नहीं।
जानकारी के अनुसार वाराणसी के रहने वाला 49 वर्षीय रमेश पिछले 15 साल से तंबाकू और शराब पीने का आदी था। इस वजह से उसको मुंह का कैंसर हो गया था जो धीरे-धीरे गंभीर रूप लेता जा रहा था और चौथी स्टेज में पहुंच गया था। मुल्लांपुर न्यू चंडीगढ़ के होमी भाभा कैंसर अस्पताल के डॉक्टरों ने बताया कि जब रमेश उनके पास इलाज के लिए आया तो उसकी हालत बहुत खराब थी। वह 10 महीने से अपना मुंह नहीं खोल पा रहा था, जिस वजह से उसका खाना पीना मुश्किल हो गया था। मरीज के मुंह में कीड़े चलने शुरू हो गए थे। इसलिए उसका जल्द से जल्द ऑपरेशन करना बहुत जरूरी था। वह पहले ही पैसों के अभाव के चले इलाज के लिए देरी कर चुका था। इसके बाद अस्पताल के डॉक्टरों के बोर्ड ने इस मरीज का इलाज खुद करने का निर्णय लिया। इसके बाद सात फरवरी को मरीज का सफल ऑपरेशन कर अपनी निगरानी में रखा और इसके बाद उसे डिस्चार्ज कर दिया गया।
बुक्कल म्यूकोसा कैंसर और इसके लक्षण
बुक्कल म्यूकोसा कैंसर मुंह के भीतर गाल में शुरू होता है, जिसका सही समय पर इलाज न होने पर पूरे इसका शरीर में फैलने का खतरा बढ़ सकता है। इसके शुरुआती लक्षण मुंह में घाव, उभरे हुए धब्बे और मुंह से खून आना है। देखा गया है कि यह बीमारी आमतौर पर अधिक मात्रा में तंबाकू, सुपारी, गुटखा और शराब आदि चीजों का इस्तेमाल करने वालों को होती है। यह एक प्रकार का सिर और गर्दन का कैंसर है। बुक्कल म्यूकोसा होठों और गालों के अंदर से लेकर आखिरी दांत के पीछे तक फैली एक नर्म और गीली एक झिल्ली है जो ऊतक की कई परतों से बनी होती है और इसका मुख्य कार्य खाने को चबाने के समय मुंह को सहारा देना होता है। इस बीमारी के समय इसमें घाव धब्बे और खून आने लगता है। इससे चार चरणों में बांटा गया है। पहले चरणों में इलाज करना डॉक्टरों के लिए आसान रहता है और बीमारी से ग्रस्त मरीज की जान को खतरा भी कम रहता है। लेकिन जैसे-जैसे बीमारी के चरण बढ़ने लगते हैं तो यह बीमारी भी गंभीर होती जाती है और उतना ही अधिक समय मरीज को ठीक करने में डॉक्टरों को भी लगता है।