मोहाली। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग मोहाली ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्काई रॉक वेलफेयर सोसाइटी को एक ग्राहक द्वारा जमा की गई 6.85 लाख की राशि लौटाने का निर्देश दिया है। सोसाइटी ने ग्राहक को सेक्टर 111-112, मोहाली में एक फ्लैट दिलाने का वादा किया था, लेकिन कई साल बीतने के बाद भी उसे न तो फ्लैट मिला और न ही उसके पैसे वापस किए गए। आयोग ने इसे सेवा में कमी और अनुचित व्यावसायिक व्यवहार मानकर यह फैसला सुनाया। शिकायतकर्ता ने आयोग में शिकायत दर्ज कराई। शिकायतकर्ता ने 15 जनवरी 2012 को सोसाइटी का सदस्य बनने के लिए 10 हजार का सदस्यता शुल्क और 6.75 लाख की पहली किस्त जमा की थी। इस प्रकार उन्होंने सोसाइटी को कुल 6.85 लाख का भुगतान किया था। सोसाइटी ने वादा किया था कि यदि ग्राहक एक वर्ष के बाद भी परियोजना से हटता है, तो उसका पैसा ब्याज सहित वापस कर दिया जाएगा।
शिकायतकर्ता ने आयोग को बताया कि सोसाइटी के पास आवश्यक अनुमोदन और मंजूरी नहीं थी, फिर भी उन्होंने विज्ञापन दिए और ग्राहकों से पैसे वसूलते रहे। बाद में पता चला कि अधिकारियों ने सोसाइटी की सीएलयू रद्द कर दी है। इसके अलावा गमाडा ने 28 फरवरी 2017 को अखबार में एक सार्वजनिक सूचना भी जारी की थी, जिसमें आम जनता को स्काई रॉक वेलफेयर सोसाइटी के किसी भी प्रोजेक्ट में प्लॉट, फ्लैट या दुकानें न खरीदने की चेतावनी दी गई थी।
आयोग ने पाया कि सोसाइटी ने सुनवाई के दौरान भी अपना पक्ष प्रस्तुत नहीं किया और उसके विरुद्ध एकतरफा कार्रवाई की गई। सभी साक्ष्यों और अभिलेखों को देखने के बाद आयोग ने इसे सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार माना। इस निर्णय में आयोग ने सोसाइटी को निर्देश दिया कि वह जमा की तिथि से 30 दिनों के भीतर शिकायतकर्ता को 6.85 लाख रुपये की राशि 9 फीसदी वार्षिक ब्याज सहित लौटाए। यदि वह ऐसा करने में विफल रहती है, तो यह ब्याज दर बढ़कर 12 फीसदी हो जाएगी। इसके अतिरिक्त सोसाइटी शिकायतकर्ता को मानसिक कष्ट और कानूनी खर्च के लिए 30 हजार रुपये की एकमुश्त राशि भी अदा करे।