मोहाली। आय से अधिक संपत्ति मामले में पूर्व ईओ गिरीश वर्मा के बेटे को विकास को विजिलेंस ने गिरफ्तार किया था। आरोपी विजिलेंस के पास तीन दिन के पुलिस रिमांड पर है। पूछताछ में यह बात सामने आई कि विकास वर्मा अपने पिता के काले धन को वाइट करता था, इसके लिए उसने वर्ष 2020 में रियल एस्टेट फर्म बालाजी इंफ्रा बिल्डटेक और बालाजी डेवलपर्स बनाई थी। उसने इस फर्म में कुराली के रहने वाले संजीव कुमार, गौरव गुप्ता और आशीष शर्मा को अपना पार्टनर बनाया था। वह उनके खातों में पैसे अदला बदली करके अपने पिता के काले धन को वाइट करता था। विजिलेंस इस मामले में कुराली के पूर्व पार्षद गौरव गुप्ता, संजीव कुमार (निवासी खरड़ ) व पवन कुमार (निवासी पंचकूला, एक कॉलोनाइजर) को पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। गिरफ्तारी से बचने के लिए विकास ने हाईकोर्ट में अपनी अग्रिम जमानत याचिका लगाई थी लेकिन अदालत ने उसे रद कर दिया था।
बता दें कि 2022 में गिरीश वर्मा और अन्य के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति जमा करने के मामले में एफआईआर नंबर -18 दर्ज हुई थी। जांच के दौरान पाया गया कि गिरीश वर्मा ने अपनी पत्नी संगीता वर्मा और बेटे विकास वर्मा के नाम पर 19 प्रमुख आवासीय/व्यावसायिक संपत्तियां खरीदी थी। आरोपी गिरीश वर्मा ने जीरकपुर, खरड़, कुराली, डेराबस्सी आदि के नगर परिषदों में ईओ के रूप में कार्य किया था और स्थानीय बिल्डरों/डेवलपर्स को गलत लाभ पहुंचाते थे और इसके बदले में उन्होंने अपनी पत्नी और बेटे के नाम पर बैंक प्रविष्टियों के रूप में अवैध धन प्राप्त किया। यह धन संपत्तियां खरीदने के लिए उपयोग किया गया था। उन्होंने कहा कि विकास वर्मा और संगीता वर्मा के पास इन संपत्तियों से मिलने वाले किराए के अलावा कोई वैध आय का स्रोत नहीं था।