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एफसीआई भ्रष्टाचार : 2004-05 के दो मामलों में 17 दोषी, तीन साल तक की सजा

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मोहाली। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की विशेष अदालत ने भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) में भ्रष्टाचार के दो मामलों में 17 आरोपियों को दोषी ठहराया है। यह फैसला वर्ष 2004-05 के खरीद सीजन में घटिया चावल स्वीकार करने से संबंधित है। दोषियों को छह महीने से तीन वर्ष तक की कारावास और 10 हजार से 20 हजार रुपये तक के जुर्माने की सजा सुनाई गई है। दोषी ठहराए गए लोगों में एफसीआई के नौ तत्कालीन अधिकारी और आठ निजी व्यक्ति शामिल हैं। इनमें राइस मिल संचालक भी शामिल थे। अदालत ने पाया कि अधिकारियों ने निजी राइस मिल मालिकों के साथ मिलकर मानकों से कम गुणवत्ता वाले चावल स्वीकार किए।
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इस मिलीभगत से सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचा। सीबीआई के सरकारी वकील अनमोल नारंग ने इस मामले की पैरवी की। इन मामलों में चार अन्य आरोपियों को आरोपों से बरी कर दिया गया। कुछ आरोपियों के खिलाफ पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पहले ही कार्रवाई रद्द कर दी थी। वहीं, कुछ आरोपियों की मुकदमे के दौरान मृत्यु होने पर उनके खिलाफ कार्यवाही समाप्त कर दी गई। पहला मामला फरीदकोट जिला कार्यालय के अधीन निहाल सिंह वाला केंद्र से जुड़ा था। इस मामले में तत्कालीन एजी जसवीर सिंह, तत्कालीन एएम अमरजीत सिंह बराड़ और डिप्टी मैनेजर आजाद सिंह को दोषी ठहराया गया। जिला प्रबंधक राकेश रंजन, वरिंदर कुमार, परवीन कुमार और तरसेम लाल को भी दो साल तक की कैद की सजा मिली। निजी व्यक्तियों में संजीव कुमार को सबसे अधिक तीन वर्ष की कारावास हुई है।
मुक्तसर केंद्र से जुड़े हैं दोषी
दूसरा मामला मुक्तसर केंद्र से संबंधित था। इसमें तत्कालीन तकनीकी सहायक तारा चंद खत्री, हरी राज अरोड़ा, एएम परम दास और अधिकारी इंद्रजीत अरोड़ा दोषी पाए गए। एएम (क्यूसी) वीके मिश्रा और जिला प्रबंधक राकेश रंजन को भी सजा सुनाई गई। निजी व्यक्तियों में अमनदीप, रामपाल, रवि कुमार और जोगिंदर पाल को दोषी ठहराया गया। अमनदीप और रवि कुमार को तीन-तीन वर्ष की कारावास मिली, जबकि अन्य को दो वर्ष की सजा हुई।
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