चंडीगढ़-मोहाली बॉर्डर पर चल रहे किसानों के आंदोलन को उस समय और मजबूती मिली, जब पंजाब के अलग-अलग इलाकों से किसान जत्थों के रूप में मोर्चे में पहुंचे। वीरवार को बॉर्डर पर चार हजार से ज्यादा किसानों के जुटने का दावा किया गया।
किसानों ने एकजुट होकर अपनी लंबित मांगों को जल्द पूरा करने की मांग उठाई। किसान नेताओं ने कहा कि लंबे समय से मांगों को लेकर सरकार के समक्ष आवाज उठाई जा रही है, लेकिन अभी तक ठोस समाधान नहीं निकला है। किसान नेता हरिंदर सिंह,जगमोहन सिंह, हरमीत सिंह,रामिंदर सिंह ने बॉर्डर पर पहुंचे किसानों ने कहा कि वे अपनी मांगों को लेकर पीछे हटने वाले नहीं हैं।
किसान जत्थों के पहुंचने के साथ ही धरना स्थल पर किसानों की संख्या बढ़ती गई। किसानों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कहा कि उनकी जायज और लंबित मांगों पर जल्द फैसला लिया जाना चाहिए। आंदोलन में शामिल किसानों ने कहा कि जब तक उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लिया जाता, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।
किसान नेताओं ने कहा कि पंजाब के विभिन्न जिलों से किसान अपने साथियों के साथ आंदोलन को समर्थन देने के लिए पहुंच रहे हैं। उनका कहना है कि किसान खेती के साथ-साथ अपने अधिकारों और भविष्य की लड़ाई भी लड़ रहे हैं। सरकार को किसानों की समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर हल करना चाहिए।
धरना स्थल पर किसानों के लिए बैठने और रुकने की व्यवस्था की गई है। किसानों का कहना है कि वह शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज सरकार तक पहुंचा रहे हैं। इसके बावजूद यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आंदोलन को आगे भी जारी रखा जाएगा।
किसानों ने कहा कि अलग-अलग किसान संगठनों और जत्थों का समर्थन मिलने से आंदोलन को नई ताकत मिली है। उन्होंने एक स्वर में कहा कि सरकार उनकी लंबित मांगों को जल्द माने और किसानों को राहत प्रदान करे। बॉर्डर पर जुटे किसानों ने कहा कि उनका उद्देश्य अपनी मांगों को मजबूती से सरकार के सामने रखना है और इसके लिए वे एकजुट होकर संघर्ष करते रहेंगे।