मोहाली। जाॅइनिंग लेटर की मांग को लेकर 25 नवंबर से चल रहा डीपीआई दफ्तर के बाहर ईटीटी यूनियन-5994 और 2364 की ओर से शुरू किया गया रोष प्रदर्शन तीसरे दिन बुधवार को भी जारी रहा। इस दौरान उन्होंने शिक्षा विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस माैके पर भारी संख्या में पुलिस फोर्स भी तैनात रही।
इस संबंध में यूनियन के नेताओं ने बताया कि मंगलवार को शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने उनके साथ बैठक के दौरान उक्त 5994 और 2364 चयनित अभ्यर्थियों को जाॅइनिंग लेटर देने के लिए दो दिन का समय मांगा था। इसके तहत यूनियन ने डीपीआई कार्यालय के सामने शांतिपूर्ण धरना देने का निर्णय लिया। इसके चलते ईटीटी बेरोजगार अध्यापक बुधवार को शांतिपूर्वक बैठे रहे। यूनियन के नेताओं ने कहा कि अगर इन दो दिनों में पंजाब सरकार ने हमें स्कूलों में जाॅइनिंग करवाने का कोई सकारात्मक फैसला नहीं लिया तो ईटीटी बेरोजगार अध्यापक और भी सख्ती से अपने रोष प्रदर्शन को तेज करेंगे।
नेताओं के अनुसार उक्त ईटीटी-5994 भर्ती पर पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय की ओर से किसी भी प्रकार की कोई रोक नहीं लगाई गई है, लेकिन शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों ने बहाना बनाकर जाॅइनिंग की पूरी प्रक्रिया को रोक दिया है। दोनों ईटीटी टीचर्स यूनियनों के नेता बलिहार सिंह, हरजीत बुढलाडा, बंटी कंबोज, गुरसंगत बुढलाडा, बग्गा खुडाल, परमपाल फाजिल्का, मनप्रीत मानसा, रमेश अबोहर, आदर्श अबोहर और हरीश कंबोज ने बताया कि ईटीटी-2364 भर्ती संबंधी प्रोविजनल सिलेक्शन लिस्ट शिक्षा विभाग की ओर से 25 जुलाई 2024 को और 5994 भर्तियों की प्रोविजनल सिलेक्शन लिस्ट 1 सितंबर-2024 को जारी की जा चुकी हैं, लेकिन अभी तक शिक्षा विभाग की ओर से टीचरों को ज्वाइन नहीं करवाया गया।
उन्होंने कहा कि राज्य के चार क्षेत्रों में उपचुनाव के कारण शिक्षा विभाग ने चुनाव पंजीकरण के बहाने भर्ती प्रक्रिया रोक दी थी। इसके बाद भारत निर्वाचन आयोग ने उक्त भर्ती के लिए मतदान दिवस से पहले ही स्टेशन इलेक्शन पोर्टल खोल दिया था और स्टेशन चुनाव कराने और चुनाव दिवस के तुरंत बाद जाॅइनिंग की अनुमति दे दी थी। इस दौरान 14 अक्तूबर को ईडब्ल्यूएस कैटेगरी को लेकर एक रिजर्व फैसला माननीय हाईकोर्ट की ओर से सुनाया गया। इस संबंधी सुनवाई 18 नवंबर को हुई। इसके लिखित ऑर्डर में किसी भी तरह की कोई रोक-टोक का जिक्र नहीं है, जबकि सिर्फ अगली तारीख 17 जनवरी 2025 रखी गई है। इसके बाद जैसे ही यूनियन के नेता माननीय उच्च न्यायालय के आदेश को लेकर विभाग के उच्च अधिकारियों से मिले तो उन्होंने कहा कि इस भर्ती प्रक्रिया पर रोक है, जबकि ऐसा कुछ भी नहीं है।
नेताओं ने कहा कि जब हमने इस आदेश पर संघ के वकीलों से चर्चा की तो उन्होंने स्पष्ट किया कि आदेश पर कोई रोक नहीं है, शिक्षा विभाग चाहे तो उन्हें स्टेशन अलॉट कर स्कूलों में ज्वाइन करवा सकता है, लेकिन शिक्षा विभाग ऐसा नहीं कर रहा है।