जीरकपुर। नगर परिषद (एमसी) शहर में लगे बैनर, पोस्टर व होर्डिंग्स को हटाने वाले हाईकोर्ट के आदेश पर चुप है। अभी तक सिर्फ अंबाला-चंडीगढ़ हाईवे पर लगे बड़े होर्डिंग्स को उतारा गया है, शहर के अन्य हिस्से ढकोली, पीरमुछल्ला, बलटाना, नाभा प्रचार सामग्री से पटे हैं। चाहे वह किसी की निजी संपत्ति पर लगे हों या सरकारी पर। शहर के अन्य इलाकों से प्रचार सामग्री न हटने की एक मुख्य वजह सात दिन से हड़ताल पर बैठे कच्चे कर्मचारी भी हैं। अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठे कर्मचारियों की वजह से शहर की सफाई व्यवस्था से लेकर होर्डिंग्स उतारने का काम भी ठप पड़ा है। अब सवाल यह उठता है कि धरने पर बैठे कर्मचारियों के अलावा शहर में लगे होर्डिंग्स को कौन हटाएगा।
धरने पर बैठे हैं कर्मचारी
कर्मचारी यूनियन के प्रधान प्रदीप सूद के मुताबिक नगर परिषद के लिए ठेके पर काम कर रहे कर्मचारियों की संख्या साढ़े पांच सौ है। इनमें से थर्ड क्लास के 175 और फोर्थ क्लास के 375 कर्मचारी शामिल हैं। थर्ड क्लास में ड्राइवर, डाटा ऑपरेटर, चपरासी जैसे कर्मचारी है। फोर्थ क्लास में कचरा उठाने वाले, सीवर मैन, सफाई करने वाले कर्मचारी हैं। वे अपनी मांगों को लेकर सात दिन से अनिश्चितकाल धरने पर बैठे हैं। सूद ने बताया कि 6 मई से सभी कर्मचारियों ने हड़ताल शुरू की थी। इससे पहले डेराबस्सी हलका विधायक कुलजीत सिंह रंधावा, नगर परिषद कार्यकारी अधिकारी (ईओ) परविंदर सिंह भट्टी, एएसपी गजलप्रीत कौर को हड़ताल से संबंधित पत्र लिखकर दिया था। इसके बाद हड़ताल शुरू की गई, लेकिन अभी तक पंजाब सरकार ने जीरकपुर नगर परिषद के परिसर में हड़ताल पर बैठे कर्मचारियों की कोई सुनवाई नहीं की है। उन्होंने कहा कि शहर में लगे होर्डिंग्स नहीं उतरे, कचरा उठान बंद है, सफाई व्यवस्था चौपट है। इसकी जिम्मेदार जीरकपुर नगर परिषद और पंजाब सरकार की है।
यह थे आदेश
18 अप्रैल 2026 को अदालत ने नगर निगम के कार्यकारी अधिकारी को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था कि जीरकपुर के विभिन्न क्षेत्रों में अवैध रूप से लगे सभी बिलबोर्ड, यूनिपोल, बाईपोल को हटा दिया जाए जहां उनकी अनुमति नहीं है। अदालत ने नगर परिषद को यह कार्य 8 मई 2026 की सुनवाई से पहले करने के आदेश दिए थे।
हड़ताल पर बैठे कर्मचारियों से हमारी बात चल रही है। उनके वेतन बढ़ाने और पक्का करने का काम राज्य सरकार का है। जल्द ही शहर के सभी होर्डिंग हटवा दिए जाएंगे और कचरा भी उठवाया जाएगा। -परविंदर सिंह भट्टी, ईओ, नगर परिषद जीरकपुर।