मोहाली। न्यू चंडीगढ़ स्थित होमी भाभा कैंसर अस्पताल ने चिकित्सा मृत्यु प्रमाणन को मजबूत बनाने के उद्देश्य से राज्यस्तरीय ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर्स वर्कशॉप का आयोजन किया। इसमें अस्पताल के निदेशक डॉ. आशीष गुलिया ने कहा कि मृत्यु के वास्तविक कारणों का पता लगाना अत्यंत आवश्यक है, ताकि हमारा स्वास्थ्य तंत्र रोकथाम योग्य कारणों को समय रहते नियंत्रित कर सके और अधिक से अधिक जीवन बचाए जा सके। वर्कशाप के दौरान कुमार राहुल ने कहा कि मेडिकल सर्टिफिकेशन ऑफ कॉज ऑफ डेथ फॉर्म हमारी सार्वजनिक स्वास्थ्य रणनीति की आधारशिला है। यह कार्यशाला भारत सरकार के निदेशालय जनगणना संचालन पंजाब और पंजाब सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सहयोग से आयोजित किया गया। इसमें राज्य सरकार नामित चिकित्सकों और सांख्यिकीय कैडर के मृत्यु कोडर्स ने भाग लिया। वर्कशाप का शुभारंभ स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव कुमार राहुल, निदेशक जनगणना संचालन निदेशालय पंजाब, डॉ. नवजोत खोसा, अस्पताल के निदेशक डॉ. अवनीश कुमार और निदेशक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग एवं मुख्य जन्म–मृत्यु रजिस्ट्रार डॉ. हितिंदर कौर ने मिलकर किया।
पंजाब में सिर्फ 32.6% मौतों का मेडिकल प्रमाणन
पंजाब में मृत्यु पंजीकरण की वर्तमान स्थिति इस प्रशिक्षण की आवश्यकता को स्पष्ट करती है। जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम 1969 के अनुसार सभी मौतों का मेडिकल प्रैक्टिशनर द्वारा प्रमाणित होना जरूरी है, लेकिन वर्ष 2022 में दर्ज 2,38,304 मौतों में से केवल 77,667 ही मेडिकल रूप से प्रमाणित हुईं, जो मात्र 32.6% है। एमसीसीडी फॉर्म पर वास्तविक मृत्यु कारण दर्ज करना न केवल कानूनी आवश्यकता है, बल्कि इससे नीति निर्माताओं को यह तय करने में भी मदद मिलती है कि स्वास्थ्य संसाधन किस क्षेत्र में अधिक निवेश किए जाएं। टाटा मेमोरियल सेंटर का यूनिट फॉर स्ट्रेंथनिंग कॉज ऑफ डेथ इस राष्ट्रीय क्षमता-वृद्धि अभियान का नेतृत्व कर रहा है, जो महाराष्ट्र से बढ़कर अब नौ राज्यों, जिसमें पंजाब भी शामिल है, तक फैल चुका है।