अब मोहाली में ड्राइविंग टेस्ट देने वालों की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। जल्द ही मोहाली के ड्राइविंग टेस्ट का सिस्टम स्मार्ट हो जाएगा। यह सिस्टम वाहन चालकों की नजरों से लेकर ट्रैक तक की निगहबानी करेगा। जरा सी चूक हुई तो फिर वाहन चालक टेस्ट में फेल। दरअसल यह है माइक्रोसॉफ्ट की हारनेसिंग आटो मोबाइल्स फॉर सेफ्टी (एचएएमएस) टेक्नोलॉजी है, जिसके माध्यम से यहां पर ड्राइविंग टेस्ट किए जाएंगे।
मोहाली के सेक्टर-82 में ड्राइविंग टेस्ट के लिए बनाए गए ट्रैक पर यह सिस्टम इंस्टाल कर दिया गया है। अब सिर्फ बिल्डिंग के इंफ्रास्ट्रक्चर को ही बदला जाना बाकी है। सारा कुछ ठीक रहा तो यह टेस्ट अगस्त तक शुरू हो जाएंगे। टेस्ट के वही ट्रैक इस्तेमाल किया जाएगा, जिसमें फिलहाल टेस्ट किए जा रहे हैं। ट्रैक पर खास प्रकार के मार्कर हैं, जिनको टेस्ट के शुरू होते ही एक्टिवेट कर दिया जाएगा।
स्पेशल रूम में बताएंगे कैसे होगा टेस्ट
आरटीओ सेक्टर-82 के ड्राइविंग टेस्ट सेंटर में टेस्ट देने आने वालों के लिए एक स्पेशल रूम बनाया जाएगा। जैसे ही ड्राइविंग टेस्ट देने वाले आएंगे तो उनको एक टोकन दिया जाएगा, इसके बाद टोकन लेकर वह व्यक्ति स्पेशल रूम में जाएंगे, जिसमें उनको बताया जाएगा कि उनको कैसे टेस्ट देना है। इस दौरान उनको पूरी जानकारी दी जाएगी। जिससे कि वह ड्राइविंग के समय ख्याल रख सकें।
अब इस प्रकार से होगा टेस्ट
आरटीओ में जब आप ड्राइवर लाइसेंस टेस्ट के लिए जाएंगे तो आपकी कार की विंडशील्ड पर स्मार्टफोन लगा दिया जाएगा। जिसमें आपको दिए गए नंबर को डाल दिया जाएगा। जिससे आपकी सारी जानकारी स्मार्ट फोन पर आ जाएगी। अब स्मार्टफोन और टेस्टिंग ट्रैक पर मौजूद एज सर्वर पर चलने वाला एचएएमएस बाकी काम कर देगा और टेस्ट प्रक्रिया पूरी होने के तुरंत बाद एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर देगा।
क्या है एचएएमएस टेक्नोलॉजी
ड्राइवर लाइसेंस जारी करने के लिए यह एक स्मार्टफोन-आधारित ड्राइविंग परीक्षण प्रणाली है। इसमें स्मार्टफोन के फ्रंट और रियर कैमरों और अन्य सेंसर का उपयोग करके ड्राइवर की निगाह और उसके सामने के सड़क दृश्य यानी सामने वाले वाहन की दूरी पर एक साथ नजर रखा जाता है। यह खास आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस आधारित माडल है। इसमें पैरलल पार्किंग में कार चालक ढंग से पार्किंग कर रहे हैं या नहीं, गोल चक्कर पर कार कैसे चल रही है, इसके साथ ही ड्राइवर की नजरें किधर की ओर हैं, इसका मुआयना करता है।
अभी ओवरहेड कैमरों से होती है नजर
फिलहाल ड्राइविंग टेस्ट मैनुअल होता है। जिसमें ड्राइविंग टेस्ट देने वाले जैसे ही ट्रैक पर जाते हैं तो कैमरों की नजरों से उनको देखा जाता है। वह गाड़ी कैसे ड्राइव कर रहे हैं। इसमें न तो ड्राइवर की नजरों का आंकलन किया जाता है न उसकी स्टेयरिंग को मोड़ने आदि की जानकारी मिल पाती है। हां, ट्रैक पर कार कैसे चल रही है उसकी जानकारी अवश्य मिल जाती है।
अब तक टेस्ट में 98 फीसदी तक लोग पास हो रहे थे। इसमें कमी यह थी कि ड्राइवर के मूवमेंट पर नजर नहीं होती थी। नई तकनीक माइक्रोसॉफ्ट की डवलप की गई तकनीक है, जिसमें जैसे ही स्मार्ट फोन पर अपलोडिंग होगी तो एक्टिवेट किया गया सिस्टम ड्राइवर की हर जानकारी देगा। इसमें ड्राइवर ने बेल्ट लगाई कि नहीं लगाई, ड्राइविंग के दौरान उसकी नजरें कहां होती हैं और ड्राइविंग में कितनी एक्यूरेसी है, सभी जानकारी मिल जाएंगी। इसका लाभ होगा कि जो भी टेस्ट पास करेगा वह ड्राइविंग में परफेक्ट होगा। उसका लाभ कई जगह मिलने वाला है।
-मोनीष कुमार, स्टेट ट्रांसपोर्ट कमिश्नर