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Mohali News: एसटीपी के जवाब पर हाईकोर्ट असंतुष्ट, अधिकारियों को लगाई फटकार

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नयागांव। इलाके में मूलभूत सुविधाएं न मिलने पर जनता ने हाईकोर्ट का रुख कर रखा है। नयागांव में आए दिन आबादी बढ़ती जा रही है और इस हिसाब से सरकारें यहां सुविधाएं नहीं दें पा रही हैं। इलाके की सबसे बड़ी मांग एसटीपी, पटियाला की राव नदी के किनारों पर कूड़े के ढेर हटाना, सड़कों का चौड़ीकरण करने और गलियों की मरम्मत की है। इसे लेकर हाईकोर्ट का रुख किया गया था। वहीं, हाईकोर्ट इस मामले में गंभीर है और इस वजह से हर माह सुनवाई कर अधिकारियों से रिपोर्ट तलब की जा रही हैं। पिछले सप्ताह की सुनवाई में अदालत ने अधिकारियों से एसटीपी के लिए बार-बार जगह बदलने को लेकर फटकार लगाते हुए अगली सुनवाई पर गूगल साइट प्लान पेश करने का आदेश दिया था।
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जानकारी के अनुसार नगिंदर काहलों ने अपनी तीन एकड़ जमीन एसटीपी लगाने के लिए इसका एफिडेविट परिषद को दे दिया था। इसके बाद अधिकारियों ने इस जगह पर एसटीपी लगाने के लिए 2020 में शुरुआती प्रक्रिया भी शुरू कर दी थी। इसके बाद अधिकारियों ने बिना किसी कारण के वहां एसटीपी को लगाने में दिलचस्पी नहीं दिखाई थी। इस कारण अधिकारियों को अदालत की अवहेलना का सामना करना पड़ रहा है। अब अधिकारियों ने कोर्ट में बताया कि उनकी 20 फरवरी 2024 को एक बैठक हुई, जिसमें नयागांव के ईओ, अडिशनल चीफ सेक्रेटरी एनिमल हसबेंड्री विभाग, प्रिंसिपल सेक्रेटरी लोकल बॉडी, सीईओ सीवरेज बोर्ड, एडीसी मोहाली आदि अधिकारियों ने फैसला लिया कि अब एसटीपी गांव पड़च में लगाया जाएगा, जिस पर कोर्ट ने कहा कि अधिकारी एसटीपी की जगह बार-बार बदलकर कोर्ट को गुमराह कर रहे हैं, और वे इसे लगाना ही नहीं चाहते। इसलिए अधिकारी बताएं कि किसको कोर्ट की अवहेलना पर जेल भेजा जाए? जिस पर अधिकारियों की ओर से पेश हुए वकील ने जल्द इस पर काम करने की बात कही। अब कोर्ट ने अधिकारियों को 19 मार्च 2024 को एसटीपी की जगहों का गूगल साइट मैप प्लान पेश करने के आदेश जारी किए हैं।

कोट
एसटीपी को लेकर बड़ी ही गंभीर है। जब सुनवाई चल रही थी तो मैं कोर्ट रूम में ही मौजूद था, क्योंकि मैं भी इस केस में बतौर वकील शामिल हूं। हाईकोर्ट अधिकारियों के इस रवैये से काफी नाराज है और हाईकोर्ट का कहना है कि 14 साल से नयागांव के विकास कार्य लटके हुए हैं। इसपर अधिकारी कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। लगता है कि जल्द नयागांव में एसटीपी का रास्ता साफ हो सकता है। -एडवोकेट कमलदीप सिंह सिद्धू, पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
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