जीरकपुर/लालड़ू। देश सेवा का जज्बा अगर आपके मन में है तो कोई बाधा आपकी राह में रोड़ा नहीं डाल सकती। ऐसा ही उदाहरण पेश किया है मोहाली जिले के गांव लालड़ू के रहने वाले दिग्विजय सिंह राणा ने। वे कमीशन हासिल कर सेना में लेफ्टिनेंट बने हैं। इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे थे, लेकिन मन में देश सेवा की कुलबुलाहट रहती थी। इसलिए पढ़ाई के साथ-साथ सीडीएस परीक्षा की तैयारी भी करने लगे। उन्होंने 10 बार यह परीक्षा दी और 11वीं बार बाधा पार कर ली। चेन्नई में एक साल के प्रशिक्षण के बाद 19 जून को उन्हें श्रीनगर यूनिट में ज्वाइन करना है।
उन्होंने बताया कि सेना में भी करिअर के बेहतर विकल्प हैं। यहां सिर्फ दुश्मनों से जंग करना ही नहीं है, बल्कि कई ऐसे क्षेत्र भी हैं, जहां प्रतिभा को निखारकर का अपना नाम रोशन कर सकते हैं। लेफ्टिनेंट बने दिग्विजय सिंह ने पिता भूपिंदर सिंह राणा भी सेना में हैं।
पिता के कहने पर उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई लांडरां स्थित सीजीसी से की, लेकिन मन में सेना का अधिकारी बनने की ललक थी। बस फिर क्या था, इंजीनियिंरग के साथ-साथ सीडीएस परीक्षा की तैयारी भी करता रहा। 10 बार परीक्षा दी और 11वीं बार नंबर आ गया।
पूर्व राष्ट्रपति डॉ. अब्दुल कलाम को आदर्श मानते हैं दिग्विजय
दिग्विजय ने बताया कि उन्हें पढ़ने का बहुत शौक है। ज्यादातर चीजों में डॉ. अब्दुल कलाम की बातों को फोलो करता हूं। डॉ. कलाम मेरे आदर्श हैं। हरेक इंसान की कामयाबी में परिवारवालों की भूमिका सबसे अहम होती है। मेरी कामयाबी के पीछे माता-पिता का खास योगदान है। पिता भूपिंदर सिंह राणा सेना और मां निजी सेक्टर में कार्यरत हैं जबकि बड़ी बहन ने टीचिंग की पढ़ाई की है, जिनकी शादी हो चुकी है।