मोहाली। निजी अस्पतालों में महंगे इलाज और मरीजों से जुड़े विवादों को देखते हुए मोहाली के विधायक कुलवंत सिंह ने पंजाब विधानसभा में नियामक प्राधिकरण बनाने की मांग की। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह से आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के मरीजों को मुफ्त इलाज देने की शर्त के पालन पर सवाल किए। विधायक कुलवंत सिंह ने बताया कि वर्ष 2000 से निजी अस्पतालों को जमीन आवंटन के समय यह शर्त थी। इसके तहत कमजोर मरीजों को 10 फीसदी ओपीडी और 5 फीसदी इनडोर इलाज मुफ्त या रियायती दरों पर मिलना था। उन्होंने सरकार से पूछा कि कितने मरीजों को यह सुविधा मिली और इसकी जांच कौन करता है। विधायक ने निजी अस्पतालों के भारी-भरकम बिलों से परिवारों को होने वाली परेशानी का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि बिल का भुगतान न होने पर कई बार मृतक का शव परिजनों को सौंपने में भी दिक्कत आती है। इन शिकायतों के समाधान के लिए नियामक प्राधिकरण जरूरी है। इससे अस्पतालों की जवाबदेही तय होगी और जरूरतमंदों को राहत मिलेगी।