जीरकपुर। ढकोली क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले काठगढ़ गांव में पराली जलाने का मामला सामने आया है। गांव में एक किसान ने शुक्रवार को रात के समय अपनी फसल की नाड़ को आग लगा दी। इससे आसपास के रिहायशी इलाकों में घना धुआं फैल गया। ग्रामीणों के अनुसार गांव में अब खेती योग्य जमीन करीब तीन से चार किले ही बची है। बाकी का पूरा इलाका रिहायशी बन चुका है। ऐसे में खेतों में लगाई आग का असर सीधे आसपास के घरों में रहने वाले लोगों पर पड़ता है।
आग लगाने से पूरे इलाके में धुएं का गुबार छा गया और लोगों को आंखों में जलन और सांस लेने में तकलीफ का सामना करना पड़ा। कुछ लोगों ने बताया कि बच्चों और बुजुर्गों की तबीयत पर भी इसका असर पड़ा। स्थानीय निवासियों गुरमेल सिंह, भूषण, कुलदीप, अमरजीत का कहना है कि किसान ने रात के अंधेरे में पराली को जलाया और सुबह-सुबह ट्रैक्टर चलाकर आग के निशान मिटाने की कोशिश की, ताकि कोई सबूत न बचे। ग्रामीणों के अनुसार सरकार और पर्यावरण विभाग द्वारा पराली जलाने पर चेतावनी और सख्त आदेश जारी किए जा रहे हैं। इसके बावजूद कुछ किसान इन नियमों की अवहेलना कर रहे हैं। ऐसे मामलों से न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है, बल्कि वायु प्रदूषण का स्तर भी तेजी से बढ़ता है। इससे लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ता है।
लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि इस तरह की घटनाओं पर तुरंत कार्रवाई की जाए और दोषियों पर सख्त जुर्माना लगाया जाए ताकि भविष्य में कोई भी किसान इस तरह का कदम न उठाए। मामले में पाॅल्यूशन कंट्रोल बाेर्ड के एसडीओ अतुल शर्मा का कहना है कि लोगों की शिकायत मिलने के बाद जानकारी मिली है। लोगों से हेल्पलाइन नंबर पर फोटो और वीडियो भेजने को कहा गया है। जैसे ही फोटो और वीडियो पहुंच जाएगी जांच के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी।