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राणा बलाचौरिया हत्याकांड:पश्चिम बंगाल से दो शूटर समेत तीन गिरफ्तार, DIG ने बताया आरोपियों तक कैसे पहुंची पुलिस

Mon, 12 Jan 2026 10:03 PM IST
अंकेश ठाकुर संवाद न्यूज एजेंसी, मोहाली (पंजाब)

सार

15 दिसंबर 2025 को मोहाली के सोहाना में कबड्डी टूर्नामेंट के दौरान राणा बलाचौरिया को गोलियां मारी गई थी। खेल प्रतियोगिता के बीच अचानक हुई फायरिंग में राणा बलाचौरिया की मौके पर ही मौत हो गई थी।
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दिग्विजय सिंह उर्फ राणा बलाचौरिया - फोटो : फाइल
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विस्तार
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मोहाली के सोहाना में कबड्डी प्रमोटर कंवर दिग्विजय सिंह उर्फ राणा बलाचौरिया की सनसनीखेज हत्या के मामले में पुलिस की एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स (एजीटीएफ) ने बड़ी कामयाबी हासिल की है। पंजाब, महाराष्ट्र, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल और सिक्किम तक फैले एक इंटेलिजेंस आधारित संयुक्त ऑपरेशन के तहत पुलिस ने पश्चिम बंगाल के हावड़ा से दो शूटर और उनके एक सहयोगी को गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई में सिक्किम पुलिस, मुंबई पुलिस, पश्चिम बंगाल एसटीएफ, केंद्रीय एजेंसियों और स्थानीय हावड़ा पुलिस की अहम भूमिका रही।

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गिरफ्तार आरोपियों की पहचान करण पाठक उर्फ करण डिफॉल्टर (निवासी अमृतसर), तरनदीप सिंह (निवासी बरहेवाल, लुधियाना) और आकाशदीप (निवासी उपला, तरनतारन) के रूप में हुई है। करण पाठक और तरनदीप सिंह ही वारदात को अंजाम देने वाले शूटर थे, जबकि तीसरा आरोपी आकाशदीप, विदेश में बैठे हैंडलर अमर खाबे राजपूत का करीबी रिश्तेदार है और उसने शूटरों को छिपने की जगह और अन्य लॉजिस्टिक सहायता मुहैया कराई।

कबड्डी टूर्नामेंट के दौरान की गई थी हत्या
यह हत्या 15 दिसंबर 2025 को सोहाना में आयोजित एक कबड्डी टूर्नामेंट के दौरान की गई थी। खेल प्रतियोगिता के बीच अचानक हुई फायरिंग में राणा बलाचौरिया की मौके पर ही मौत हो गई थी। इस घटना से पूरे खेल जगत और इलाके में सनसनी फैल गई थी। हत्या के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए थे।
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अब तक पांच आरोपी गिरफ्तार
डीजीपी गौरव यादव ने बताया कि इस हत्याकांड में अब तक कुल पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इससे पहले ऐशदीप सिंह और देविंदर को पुलिस ने दबोच लिया था। ताजा गिरफ्तारियों के बाद पुलिस को उम्मीद है कि मामले की पूरी साजिश और नेटवर्क जल्द ही बेनकाब हो जाएगा।

सीसीटीवी और डिजिटल फुटप्रिंट से खुली पूरी कड़ी
ऑपरेशन का विवरण साझा करते हुए डीआईजी (एजीटीएफ) गुरमीत सिंह चौहान ने बताया कि वारदात के तुरंत बाद संगठित अपराध, इंटर-गैंग रंजिश और विदेशी हैंडलरों की भूमिका के संकेत मिलने पर एजीटीएफ को जांच में शामिल किया गया। सीसीटीवी फुटेज के गहन विश्लेषण के जरिए आरोपियों की वारदात से पहले और बाद की गतिविधियों का पूरा खाका तैयार किया गया। इसके साथ ही वारदात में इस्तेमाल किए गए वाहनों की पहचान की गई और फरारी का रास्ता पानीपत टोल प्लाजा तक ट्रेस किया गया। इसके बाद आरोपियों के डिजिटल फुट प्रिंट्स को खंगाला गया, जिससे पता चला कि आरोपी मुंबई, बेंगलुरु, सिलीगुड़ी, सिक्किम, गंगटोक और कोलकाता होते हुए पश्चिम बंगाल पहुंचे थे। इसी इनपुट के आधार पर एजीटीएफ की टीम ने हावड़ा में दबिश देकर आरोपियों को गिरफ्तार किया। इस कार्रवाई में कोलकाता एसटीएफ का भी सहयोग रहा।

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