इन पुलिसकर्मियों ने जताई थी सहमति
इस मामले में छह पुलिसकर्मियों मुख्तियार सिंह, सिमरनजीत सिंह, हरप्रीत सिंह, बलविंदर सिंह, सतनाम सिंह और कांस्टेबल अमृतपाल सिंह ने पॉलीग्राफ टेस्ट करवाने के लिए सहमति दी थी और उनके बयान दर्ज किए गए थे। जांच एजेंसियों को संदेह है कि जेल के अंदर लॉरेंस बिश्नोई का इंटरव्यू सुरक्षा व्यवस्था में अंदरूनी मिलीभगत के बिना संभव नहीं था। इसी संदेह के आधार पर यह पॉलीग्राफ टेस्ट यह पता लगाने के लिए कराया जाना था कि जेल स्टाफ या पुलिस मुलाजिमों में से किसी ने लॉरेंस बिश्नोई को मीडिया तक पहुंचाने में कोई मदद तो नहीं की।
डीएसपी समेत 6 पुलिस अधिकारियों को किया गया था निलंबित
जेल में गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के इंटरव्यू का मामला सामने आने के बाद पंजाब सरकार हरकत में आई थी और डीएसपी गुरशेर सिंह संधू सहित छह पुलिस अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया था। इन सभी को 3 अप्रैल, 2022 को गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई का इंटरव्यू करने का दोषी पाया गया था, जब वह सीआईए पुलिस स्टेशन खरड़ में बंद था। ड्यूटी में लापरवाही बरतने के आरोप में इन सभी को निलंबित किया गया था। करीब डेढ़ साल बाद लॉरेंस का यह इंटरव्यू एक टीवी चैनल पर प्रसारित हुआ था, जो काफी वायरल हुआ था। निलंबित किए गए अन्य पुलिसकर्मियों में समर वनीत पीपीएस डीएसपी, सब इंस्पेक्टर रीना सीआईए खरड़, सब इंस्पेक्टर एलआर जगतपाल जग्गू एजीटीएफ, सब इंस्पेक्टर एलआर शगनजीत सिंह, एएसआई मुख्तियार सिंह और हेड कांस्टेबल ओम प्रकाश शामिल थे।
क्या होता है पॉलीग्राफ टेस्ट
पॉलीग्राफ टेस्ट, जिसे आमतौर पर झूठ डिटेक्टर टेस्ट के रूप में जाना जाता है।थ एक ऐसी तकनीक है जो किसी व्यक्ति से सवाल पूछे जाने पर उसके शरीर में होने वाले शारीरिक बदलावों को मापती है। यह उपकरण हृदय गति, रक्तचाप, सांस लेने की गति और त्वचा की नमी जैसे संकेतों को रिकॉर्ड करता है, जिनके बारे में माना जाता है कि झूठ बोलने पर इनमें बदलाव आता है। इस टेस्ट का उपयोग अक्सर आपराधिक जांचों में किया जाता है।