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जेल में पचास हजार में मिलती है सिम

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जेल में पचास हजार में मुहैया करवाता था सिम
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सिम मुहैया करवाने रमेश समेत तीन को एसटीएफ लाई वारंट पर
एसटीएफ को उम्मीद आरोपियों से पूछताछ में खुलेंगे कई राज
करोड़ों की ड्रग तस्करी मामले की एसटीएफ कर रही है जांच
अमर उजाला ब्यूरो
मोहाली।
जेल के अंदर से चल रहे नशे तस्करी के खेल की परतों को खोलने में स्पेेशल टास्क फोर्स जुट गई है। पता चला है कि यह कारोबार करने के लिए आरोपियों को पचास हजार में आसानी से मोबाइल सिम जेल में ही मिल जाती थी। साथ ही जेल के अंदर से ही सारी डीलें होती थीं। इस मामले में और कौन लोग शामिल हैं। इसकी पोल खोलने के लिए एसटीएफ तीन लोगों को प्रोडक्शन वारंट पर लेकर आई है। इसमें रमेश और बलदेव नाभा जेल व इंदु फिरोजपुर जेल से है। आरोपियों को बुधवार अदालत में पेश किया गया। जहां से रमेश और बलदेव को पंद्रह दिसंबर तक रिमांड पर भेज दिया गया। जबकि इंदु को एक दिन को पुलिस रिमांड पर भेजा गया है। वहीं, इससे पहले पकड़ी गई स्वीटी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
स्पेशल टास्क फोर्स की जांच में इस बात की पुष्टि हो चुकी है कि जेल के अंदर ही आरोपी आपस में मिले थे। इसके बाद यह कारोबार शुरू हुआ था। वहीं, टास्क फोर्स की कोशिश यह है कि प्रोडक्शन पर लाए गए आरोपियों से पूरी जानकारी हासिल की जा सके। ताकि आरोपियों की इस तस्करी चेन को तोड़ा जा सके। पहले भी उक्त लोग एनडीपीएस के केसों में जेल में बंद रहे हैं। हालांकि इससे पहले जब पुलिस नशा तस्करों को पकड़ती थी तो उनकी सर्विस चेन को तोड़ने पर जोर नहीं होता था। जबकि अब सर्विस चेन तोड़ने पर ही जोर है। एसटीएफ सूत्रों के मुताबिक, रमेश सिम व अन्य सामान मुहैया करवाने में मास्टर माइंड है। पता चला है कि उसकी ऊपर तक सेटिंग है। वह जेल में फैसिलिएटर के रूप में काम करता रहा है।
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दो मिनट के लिए मुझे पति से मिला दो
बुधवार दोपहर जब एसटीएफ ने हेरोइन तस्करी में पकड़ी गई स्वीटी को जेल लेकर जा रही थी। इस दौरान उसके पति को एसटीएफ प्रोडक्शन पर लेकर आई थी। स्वीटी ने इस दौरान एसटीएफ के मुलाजिमों से गुहार लगाई कि उसे दो मिनट के लिए ही सही पति से मिला दे। उसे पति से बात करनी है। हालांकि एसटीएफ मुलाजिमों का कहना था कि जो भी बात करनी है। अभी कर लो, किसी को अलग से नहीं मिलाया जाएगा।

ऐसे स्वीटी आई थी पकड़ में
स्पेशल टास्क फोर्स ने 345 ग्राम हेरोइन सहित दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। उसमें स्वीटी भी शामिल थी। वह हरियाणा के अंबाला शहर की रहने वाली है। जबकि उसका साथी आरोपी गुरप्रीत सिंह उर्फ गंजा है जो कि पंजाब के समाणा शहर नजदीक गांव धनौरी का रहने वाला है। एसटीएफ की टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर एयरपोर्ट रोड पर नाकेबंदी के दौरान टीडीआई सिटी के पास स्विफ्ट कार को रोक कर दोनों को गिरफ्तार किया था। चेकिंग में कार से 345 ग्राम हेरोइेन और साढ़े तीन लाख रुपये बरामद हुए थे।
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मामू था जेल से गिरोह चलाने वाला
गुरप्रीत सिंह गंजा इससे पहले बस कंडक्टर था जो लड़ाई झगड़े के केस में रोपड़ जेल में बंद था। वहां उसकी मुलाकात मनोज कुमार मामू से हुई थी, वह नशा तस्करी के केस में बंद है। गुरप्रीत गंजा जब जेल से बाहर आने लगा तो मनोज मामू ने उसकी मुलाकात स्वीटी नामक महिला से करवाई और उन्हें नशा सप्लाई करने के लिए कहा ताकि वे मोटी कमाई कर सकें। मामू ने उसे कहा कि उसके साथ महिला होने के चलते पुलिस को भी आशंका नहीं होगी। मामू ने उसे दिल्ली निवासी एक नाईजीरियन का पता बताया। जेल से बाहर आते ही गुरप्रीत गंजा अंबाला निवासी स्वीटी के संपर्क में आया और दोनों दिल्ली से हेरोइन लाकर ट्राइसिटी में सप्लाई लाने लगे थे। मामू को भी टास्क फोर्स ले आई थी। उसके बाद यह सच्चाई सामने आई।
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