74 करोड़ की बैंक धोखाधड़ी मामले में पांच काबू किए
-सीबीआई ने आरोपियों को अदालत में पेश, 25 तक पुलिस रिमांड पर भेजे गए
-आरोपियों में लुधियाना स्थित कंपनी के तीन डायरेक्टर व पंजाब नेशनल बैंक के दो अधिकारी
ं- आरोपियों पर विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज किया गया केस
अमर उजाला ब्यूरो
मोहाली।
74 करोड़ की बैंक धोखाधड़ी में सीबीआई (द सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इंवेस्टिगेशन) ने लुधियाना बेस्ड फर्म आरएस फास्टनर के तीन डायरेक्टर व पंजाब नेशनल बैंक के दो अधिकारियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों की पहचान संजीव माहेश्वरी, अजय माहेश्वरी व राजेश माहेश्वरी के रूप में हुई है। यह तीनों कंपनी के डायरेक्टर हैं, जबकि पंजाब नेशनल बैंक के चीफ मैनेजर डीके सेठी और लोकल ब्रांच मैनेजर एसके सिन्हा को भी सीबीआई ने गिरफ्तार किया है। आरोपियों पर सीबीआई ने आईपीसी की धारा 120बी, 420, 467, 468, 471 और प्रीवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट के सेक्शन 13 (2) व 13 (1) (डी) केस दर्ज किया है। सभी आरोपियों को वीरवार मोहाली स्थित सीबीआई की विशेष अदालत में पेश किया। अदालत ने आरोपियों को 25 जुलाई तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया है।
सीबीआई अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक लुधियाना स्थित आरएस फास्टनर नट बोल्ड बनाने का काम करती है। कंपनी के प्रबंधकों ने काफी चालाकी से बैंक के साथ धोखाधड़ी की। इसमें बैंक के अधिकारियों भी मिलीभगत थी। आरोपियों ने कैश क्रेडिट फंड में बदलाव कर बैंक से खेल किया था। साथ ही फर्जी दस्तावेजों के आधार पर उन्होंने बिजनेस के लिए मशीन आदि खरीदने के लिए बैंक से लोन हासिल किया। इसके बाद उन्होंने लोन राशि विदेशों से उन्हें मशीनें व अन्य सामान मुहैया करवाने वालों को ट्रांसफर कर दी। लेकिन वहां से उन्हें कोई सामान आया ही नहीं । वहीं, जो लोन उन्होंने बैंक से लिया था इसका भी कभी भुगतान नहीं किया गया। इसके अलावा अन्य खामियां सामने आईं थीं। इस मामले में सीबीआई ने एक सीए व कुछ अन्य लोगों पर भी केस दर्ज किया। हालांकि अभी वह सीबीआई की पकड़ से बाहर है।
बैंक वालों ने ध्यान हीं नहीं दिया
सीबीआई के अधिकारियों ने बताया कि जांच में आया कि बैंक अधिकारियों की मिलीभगत थी। उन्होंने कंपनी के खराब रिकॉर्ड की तरफ कभी ध्यान ही नहीं दिया। जबकि उन्होंने लोन कभी भरा नहीं। लेकिन इसके बाद भी उन्हें भुगतान किया गया।