जीरकपुर। शहर की सड़कों पर संरक्षित पशुओं का कब्जा है। इस कारण आवाजाही प्रभावित हो रही है। इसके अलावा हादसों का खतरा भी बढ़ जाता है। जनता की जेब से हर साल काऊ सेस के नाम पर लाखों रुपये वसूले जा रहे हैं, लेकिन धरातल पर न तो गायों को छत मिल रही है, न ही लोगों को सुरक्षित सड़कें। अंबाला-चंडीगढ़ हाईवे हो या तंग गलियां, हर तरफ गायों के झुंड हादसों को न्योता दे रहे हैं। जीरकपुर की कोई भी ऐसी सड़क नहीं बची है जहां संरक्षित पशुओं की भरमार नहीं हो। चंडीगढ़-अंबाला नेशनल हाईवे, पटियाला रोड, नगला रोड और पीरमुछल्ला जैसे व्यस्त इलाकों में संरक्षित के झुंड बीच सड़क पर डेरा जमाए रहते हैं। तेज रफ्तार वाहनों के सामने अचानक गायों के आने से आए दिन टक्कर हो रही है। वाहन चालकों को जान बचाने के लिए अचानक ब्रेक मारने पड़ते हैं, जिससे पीछे से आ रहे वाहन आपस में टकरा जाते हैं। एक आंकड़े के अनुसार चार हजार से ज्यादा गोवंश सड़कों पर बेसहारा घूम रहे हैं।
कूड़े के ढेर में भोजन तलाशती हैं गायें
बिशनपुर डंपिंग ग्राउंड की तस्वीर रूह कंपा देने वाली है। पेट भरने की मजबूरी में बेजुबान जानवर कचरे के ढेर में मुंह मार रहे हैं। खाने के लालच में ये गायें प्लास्टिक, नुकीली चीजें और घातक अपशिष्ट निगल रही हैं। इससे वे गंभीर बीमारियों का शिकार हो रही हैं। पंचकूला-जीरकपुर रोड के किनारे बिखरे कूड़े की वजह से ये पशु मुख्य सड़क तक आ जाते हैं, इससे यातायात पूरी तरह बाधित हो जाता है।
लाखों की वसूली, पशु बेहाल
नगर परिषद शहरवासियों से कई माध्यमों से लाखों का काऊ सेस वसूलती है। दावा किया जाता है कि हर माह 50-60 गायों को पकड़कर तहसील रोड या लालड़ू की मगरा गोशाला भेजी जाती है। नगर परिषद के अधिकारियों के अनुसार लालडू की मगरा गोशाला में 350 और तहसील रोड की गोशाला में अब तक 347 गायों को पकड़ कर भेजा गया है। एक गाय के चारे के लिए रोज के 50 रुपये निर्धारित हैं। दोनों गोशालाओं को हर माह करीब 5-5 लाख रुपये चारे के लिए नगर परिषद देता है। सवाल यह है कि अगर हर माह लाखों रुपये चारे और संरक्षण पर खर्च किए जा रहे हैं, तो सड़कों पर पशुओं की संख्या कम होने की जगह बढ़ क्यों रही है? नगर परिषद के अधिकारियों का कहना है कि लालडू के मगरा गोशाला को लाखों का भुगतान किया जा रहा है। तहसील रोड की गोशाला को भी चारे के लिए बड़ी राशि दी जा रही है। हकीकत यह है कि बलटाना, ढकोली और पीरमुछल्ला की गलियों में संरक्षित पशुओं की भरमार है।
मगरा गोशाला भेजी जाती हैं गोवंश
मगरा गोशाला के केयरटेकर मनोज ने बताया कि वर्तमान में गोशाला की 600 गाय रखने की क्षमता है। इसमें 570 गायें और सांड़ पहले से मौजूद हैं। 570 में से दो सौ से ढाई सौ की संख्या में सांड़ हैं। क्षमता के अनुसार गोशाला में तीस गायें और रखी जा सकती हैं। 32 एकड़ के एरिया में बनी मगरा गोशाला में गायों के लिए चार शेड बने हैं। एक शेड 200 फीट लंबा और 30 फीट चौड़ा है। एक शेड में 120 से 130 गायें रखी जाती हैं। उन्होंने बताया कि एक नया शेड और बनने वाला है। इसमें गायों के रखने की क्षमता और बढ़ जाएगी। मनोज के मुताबिक लालड़ू, डेराबस्सी और जीरकपुर से गायें मगरा गोशाला में अधिक आती हैं।
वित्तीय वर्ष में वसूला गया काऊ सेस
2021-22 91.06 लाख
2022-23 76.74 लाख
2023-24 1,77,31000 रुपये
2024-25 57.49 लाख
हमारी टीम रोज गायों को पकड़कर गोशाला भेज रही है। लगातार काम हो रहा है यदि फिर भी किसी एरिया में गायों की संख्या बढ़ गई है तो वहां टीम भेज दी जाएगी। - रंजीत कुमार, सेनेटरी इंस्पेक्टर, नगर परिषद