मोहाली। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की विशेष अदालत ने सिख फॉर जस्टिस (एसएफजे) के गुरपतवंत सिंह पन्नू और उसके एक साथी हरप्रीत सिंह राणा को देशद्रोह के मामले में भगोड़ा अपराधी (पीओ) घोषित कर दिया है। एनआईए के विशेष न्यायाधीश करुणेश कुमार की अदालत ने यह फैसला सुनाया है।
एनआईए की विशेष अदालत ने फैसले में कहा कि आरोपी गुरपतवंत सिंह पन्नू और हरप्रीत सिंह राणा की पेशी के लिए दिया गया समय खत्म हो चुका है। इस अवधि के दौरान पन्नू और राणा ने अदालत में न तो आत्मसमर्पण किया और न ही दोनों पुलिस के हाथ लगे। अदालत ने कहा कि दोनों आरोपियों को दिया गया 30 दिन का वैधानिक समय समाप्त हो चुका है। ऐसे में दोनों आरोपी गुरपतवंत सिंह पन्नू और हरप्रीत सिंह राणा को भगोड़ा घोषित किया गया है।
अदालत ने इस संबंधी पुलिस स्टेशन को भी सूचित करने का आदेश दिया और सुनवाई की अगली तारीख 23 अगस्त तय की है। अदालत ने यह भी कहा कि आरोपी इंद्रजीत सिंह, जसपाल सिंह, आकाशदीप सिंह और जगविंदर सिंह के पेशी वारंट भी 23 अगस्त के लिए जारी किए जाएं और संबंधित जेल अधीक्षक को आरोपी को तय तारीख पर अदालत में पेश करने का निर्देश दिया जाए।
पंजाब पुलिस ने पन्नू और राणा सहित कुछ अन्य लोगों के खिलाफ अमृतसर जिले के सुल्तानविंड पुलिस स्टेशन में जनमत संग्रह-20-20 (रेफरेंडम 20-20) के प्रचार को लेकर अक्टूबर 2018 में केस दर्ज किया था। 2020 में एनआईए ने पंजाब पुलिस से जांच अपने हाथ में ली और एक अलग मामला दर्ज किया। एनआईए ने अपनी प्राथमिकी में कहा कि मॉड्यूल को पाकिस्तान में स्थित एक आईएसआई हैंडलर जावेद खान ने पंजाब और नई दिल्ली में विभिन्न स्थानों पर खालिस्तान/रेफरेंडम-2020 पोस्टर/बैनर चिपकाने के लिए प्रेरित किया था।