मोहाली। जिले में कोरोना संक्रमण के साथ ही डेंगू व अन्य बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है। हालांकि सेहत विभाग ने उक्त बीमारियों से जिले के लोगों को बचाने के लिए ताकत झोंकी हुई है। सिविल अस्पतालों में स्पेशल वार्ड गठित करने से लेकर विशेष स्टाफ 24 घंटे के लिए तैनात कर दिया गया है।
वहीं जागरूकता वाहन इलाकों में जाकर लोगों को बीमारियों के प्रति जागरूक कर रहे हैं। साथ ही लोगों को सलाह दी जा रही है कि किसी भी तरह की बीमारी के लक्षण शरीर में दिखते हैं तो तुरंत सरकारी असपताल में पहुंचे ताकि समय से बीमारी का पता लगने के बाद इलाज शुरू करवाया जा सके। लोगों को कहा गया कि किसी भी तरह की सेहत संबंधी दिक्कत आने पर मेडिकल हेल्पलाइन नंबर 104 पर भी संपर्क किया जा सकता है।
जिले में कोरोना संक्रमण एक बार फिर सक्रिय हो गया है। इस समय 689 से अधिक मरीज हैं। इसके अलावा 1159 लोगों की मौत हो चुकी है। हालांकि विभाग ने केसों में इजाफा देखकर निजी अस्पतालों से बैठक कर अपनी तैयारी पूरी रखने की सलाह दी है। उन्हें आदेश दिए गए है कि उनके पास कोई भी केस आता है तो पहल के आधार पर इस बारे में सेहत विभाग को सूचित किया जाए। सिविल अस्पताल में कोरोना के लिए स्पेशल वार्ड गठित किया गया है। वहां पर आईसीयू से लेकर अन्य सारी सुविधाओं का इंतजाम है। इसके अलावा अस्पताल का ऑक्सीजन प्लांट भी अब सक्रिय है। डीसी अमित तलवार का कहना है कि लोगों को कोरोना महामारी से डरने की जरूरत नहीं है। केवल उन्हें उक्त बीमारियों से सावाधानी रहने की जरूरत है। विभाग की तरफ से स्पेेशल टीकारण मुहिम चलाई जा रही है। उसमें 12 साल से अधिक लोगों को पहल के आधार पर टीकाकरण करवाना चाहिए।
अब तक 3520 घरों में मिला लारवा, 48 में डेंगू की पुष्टि
जिले में अब तक 48 लोगों में डेंगू की पुष्टि हो चुकी है। वीरवार को फेज-छह स्थित जिला सिविल अस्पताल में 33 मरीजों का डेंगू टेस्ट हुआ जिसमें से एक की रिपोर्ट पॉजिटिव आई। अब तक जिले में 2147 डेंगू टेस्ट हुए हैं। 28 जुलाई को 3015 घरों में सर्वे किया गया। इनमें से 129 घरों में से लारवा मिला। वहीं अब तक पूरे जिले में 162620 घरों में सर्वे किया जा चुका है जिनमें से 3520 घरों में लारवा मिलने पर चालान नगर निगम ने काटे हैं।
हाथ मुंह की बीमारी केस आ रहे हैं सामने
जिले में अभी तक मंकी पॉक्स का एक भी केस नहीं आया है। उसकी तरह दिखने वाले हाथ, पैर और मुंह की बीमारी का खतरा बढ़ गया है। ट्राइसिटी में इस बीमारी के सबसे पहले चार केस नामी निजी स्कूल में आए थे। सिविल सर्जन डॉ. आदर्श पाल कौर ने बताया कि उक्त बीमारी से डरने की जरूरत नहीं है। पांच साल के कम उम्र के लोगों को यह अपना शिकार बनाती है। साथ ही अपने आप ही ठीक हो जाती है। इस बीमारी से घबराने की जरूरत नहीं है। उन्होंने लोगों को नसीहत दी कि साफ-सफाई रखें। रोगी के संपर्क में आने के बाद हाथों को अवश्य धोएं। चम्मच, कप, तौलिये और अन्य बर्तन किसी के साथ साझा नहीं करना चाहिए। उपयोग के बाद अच्छी तरह से धोना चाहिए। बीमार बच्चों द्वारा उपयोग किए जाने वाले खिलौनों को कीटाणुरहित किया जाना चाहिए। रोगी को अच्छा भोजन देना चाहिए। अधिक पानी पीना चाहिए और अगर बच्चा कुछ नहीं खाता-पीता है तो उसे डॉक्टर के पास ले जाएं। बीमार बच्चे को अलग रखें और सामान्य संक्रमण नियंत्रण सावधानियां बरतें। अगर स्कूल जाने वाला बच्चा इस बीमारी से ग्रसित है तो बच्चे को कम से कम 10 दिन तक स्कूल नहीं भेजना चाहिए। छात्रों को रोग के लक्षण, कारण और उपचार के बारे में जागरूक किया जाना चाहिए।