मोहाली। कोरोना की वजह से कई ऑटो, टैंपो और गाड़ियों वाले परेशानी में आ गए थे। उन्हें अपना वाहन खड़ा करके मेहनत मजदूरी करनी पड़ रही थी। लेकिन, चुनाव की वजह से करीब डेढ़ महीने से सैकड़ों लोगों को रोजगार मिला है। इसमें ऑटो से लेकर टैक्सी चालक तक शामिल हैं।
मार्च 2020 में कोरोना की दस्तक के बाद देश में लागू हुए लॉकडाउन के बाद ऑटो और टैक्सी चालकों का काम पूरी तरह से बंद हो गया था। ऑटो चालकों ने सब्जियां और फलों को सप्लाई करके परिवार का गुजारा किया। जबकि टैक्सी चालकों की कमाई बंद होने से रोड टैक्स की अदायगी नहीं कर पाए। कुछ लोगों को घरों में बैठकर गुजारा करना पड़ा।
चुनाव में मिल रही 500-700 की दिहाड़ी
विधानसभा चुनाव ऑटो चालकों के लिए ऑक्सीजन की तरह काम कर रहा है। प्रत्याशी चुनाव प्रचार करने के लिए शहर का चक्कर लगाने के लिए उन्हें प्रतिदिन 500 से 700 रुपये अदा करते हैं, जिसमें 350 रुपये सीएनजी पर खर्च होते हैं और बाकी के पैसों से घर का गुजारा चलता है।
- मान सिंह, निवासी सेक्टर-69, मोहाली।
माल ढुलाई पर पड़ा असर
लॉकडाउन से मार्केट के अंदर खरीदारी बिल्कुल कम हो गई, जिसका सीधा असर माल ढुलाई पर पड़ा। कॉमर्शियल वाहनों के चालकों को घर बैठना पड़ा। दूसरी ओर, घर बैठकर खर्च ज्यादा होता है अभी जरूर 1100 से 1200 रुपये मिल जाते हैं, लेकिन चुनाव के बाद समस्या और ज्यादा गंभीर होगी।
- सुखविंदर कुमार, टैंपो चालक।
युवा हूं, लेकिन सरकार की गलत नीतियों के चलते ऑटो चलाकर गुजारा करना पड़ रहा है। प्रशासन की ओर से कोविड को लेकर लगाए लॉकडाउन से रोजगार पूरी तरह से ठप हो गया। लेकिन, चुनाव के चलते जरूर थोड़ा बहुत काम मिल गया। चुनाव के बाद स्थिति फिर वैसी ही हो जाएगी।
- राज कोहली, ऑटो चालक, मोहाली।