चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में दीक्षांत समारोह में डिग्री लेती एक छात्रा।
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खरड़। चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में आज वो दिन था, जब स्टूडेंट्स की मेहनत रंग लाई। उन्हें भविष्य की चाबी के रूप में डिग्रीयां मिलीं। हर आंख में नई उम्मीद नए सपने थे। किसी का चेहरा खिला था, तो किसी की आंखें खुशी से छलक आईं थीं। यूनिवर्सिटी की कन्वोकेशन में 1657 स्टूडेंट्स ने डिग्री हासिल की। 26 यूनिवर्सिटी मेरिट होल्डर स्टूडेंट्स को गोल्ड मेडल मिले। खास बात यह रही कि ये कन्वोकेशन उस दिन हुआ जिस दिन इंसान को चांद पर कदम रखे 50 साल पूरे हुए। डिग्री हासिल करने वाले हर स्टूडेंट की आंख में भी अपने सपनों का चांद छूने की चाहत साफ नजर आती थी।
शनिवार को चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में हुई 6वीं कन्वोकेशन में 2014-18 बैच के ग्रेजुएशन, पोस्ट ग्रेजुएशन और पीएचडी स्टूडेंट्स को डिग्रीयां दी गईं। सीयू के वीसी डॉ. आरएस बावा ने स्वागती भाषण के बाद स्टूडेंट्स को उनकी उपलब्धि पर बधाई दी। वीसी ने स्टूडेंट्स को चुनौतियों का सामना करने और जीवन की हर समस्या का समाधान सही रास्ते से तलाशने की सलाह दी। इसके बाद यूनिवर्सिटी मेरिट होल्डर 26 स्टूडेंट्स को गोल्ड मेडल दे कर सम्मानित किया गया।
सीयू के रजिस्ट्रार बलबीर सिंह ढोल ने बताया कि कन्वोकेशन के दौरान यूनिवर्सिटी में पीएचडी के दूसरे बैच के 3 स्टूडेंट्स सहित 443 पोस्ट ग्रेजुएशन और 687 ग्रेजुएशन स्टूडेंट्स ने डिग्रियां हासिल कीं। इन सभी ने एनिमेशन, जर्नलिज्म, फिल्म स्टडीज, होटल मैनेजमेंट, बायोटेक्नोलॉजी, फॉर्मेसी, लॉ, कंप्यूटर एप्लीकेशन, फैशन डिजाइनिंग और आर्किटेक्चर जैसे फील्ड में स्टडी कर डिग्रीयां हासिल की हैं। कन्वोकेशन के दौरान सीयू के वाइस प्रेसिडेंट डीपी सिंह व प्रो वाइस चांसलर डॉ. बीएस सोही भी मौजूद थे।
रहस्यों को जानने की जिज्ञासा ही नए आविष्कारों को जन्म देती है: नोबेल पुरस्कार विजेेता
खरड़। डोनाल्ड ट्रंप की जीत पर यूनाइटेड स्टेट छोड़ने वाले नोबेल पुरस्कार विजेता नाइजीरियन लेखक वॉले सोयिंका कन्वोकेशन में चीफ गेस्ट थे। उनका यहां होना स्टूडेंट्स के लिए उत्साहजनक था। नोबेल पुरस्कार विजेता ने अपने संबोधन की शुरुआत 20 जुलाई के एतिहासिक दिन से स्टूडेंट्स को प्रेरित करते हुए की। उन्होंने कहा कि आज जब आप डिग्री हासिल कर रहे हैं, उस दिन इंसान के चांद पर कदम रखने के 50 साल पूरे हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि इंसान में छुपे रहस्यों को जानने की जिज्ञासा ही नए आविष्कारों को जन्म देती है। जिनके जरिए इंसान वो हासिल करने का प्रयास करता है जो मौजूदा समय में नामुमकिन लगता हो। उन्होंने कहा कि एक सदी पहले किसने सोचा था कि कभी चांद पर कदम रखे जा सकेंगे। इंसान की कल्पना ने ही इसे मुमकिन किया। आज हम चांद पर घर बना कर इंसान को वहां बसाने की कल्पना कर सकते हैं।