251 पेज की एफआईआर में 61 गड़बड़ियों का जिक्र, ट्रांसफर-पोस्टिंग से टेंडर और जमीन के मामलों में प्रभाव के इस्तेमाल का आरोप
संवाद न्यूज एजेंसी
मोहाली। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के ओएसडी राजबीर सिंह घुमन और अन्य के खिलाफ दर्ज 251 पेज की सीबीआई की एफआईआर के बाद मंगलवार को मोहाली और खरड़ में तीन ठिकानों पर तलाशी ली गई। सीबीआई की टीम ने फेज-11 में गुरकिरपाल सिंह थिंद से जुड़े मकान, खरड़ के वेस्टर्न टावर स्थित नितिन गोहल के फ्लैट और फेज-11 में बीर देविंदर के घर पर जांच की। टीम ने मोबाइल फोन, लैपटॉप, दस्तावेज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड खंगाले। सीबीआई ने पंजाब और चंडीगढ़ में कुल आठ ठिकानों पर कार्रवाई की थी। एजेंसी के अनुसार तलाशी के दौरान लैपटॉप, मोबाइल फोन और दस्तावेज जब्त किए गए हैं, जिनकी जांच की जा रही है।
सीबीआई की एफआईआर में वर्ष 2023 से 2026 के बीच कथित गतिविधियों का उल्लेख है। इसमें अधिकारियों की पोस्टिंग और तबादलों को प्रभावित करने, विभागीय कार्रवाई, नीतिगत फैसलों, प्रशासनिक मंजूरियों, टेंडर की शर्तों, लाइसेंस, जमीन उपयोग परिवर्तन, संपत्ति विवाद और राजस्व से जुड़े मामलों में कथित तौर पर आर्थिक लाभ के लिए प्रभाव के इस्तेमाल के आरोपों की जांच की जा रही है। एफआईआर में सरकारी आदेशों और नीतियों के मसौदे उनके आधिकारिक जारी होने से पहले निजी लोगों तक पहुंचाने के आरोप का भी उल्लेख है।
नितिन गोहल के फ्लैट में खंगाले इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड
सीबीआई की कार्रवाई का एक प्रमुख ठिकाना खरड़ के वेस्टर्न टावर स्थित नितिन गोहल का फ्लैट रहा। सीबीआई की एफआईआर में नितिन गोहल छह नामजद आरोपियों में शामिल हैं। जांच में उनके कथित तौर पर सरकारी काम करवाने के इच्छुक लोगों और प्रभावशाली सरकारी संपर्कों के बीच मध्यस्थ की भूमिका से जुड़े आरोपों की भी पड़ताल हो रही है। ईडी की ओर से पहले सामने रखी गई सामग्री में भी नितिन गोहल से जुड़े ऐसे आरोपों का उल्लेख किया गया था। मंगलवार को सीबीआई टीम ने फ्लैट में मोबाइल फोन, डिजिटल रिकॉर्ड और दस्तावेजों की जांच की। एजेंसी ने तलाशी के दौरान इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और दस्तावेज जब्त किए हैं। इनकी जांच के जरिए कथित लेनदेन, संपर्कों और सरकारी फैसलों से जुड़े लिंक तलाशे जा रहे हैं।
बीर देविंदर के घर भी पहुंची टीम
फेज-11 में बीर देविंदर के घर पर भी सीबीआई ने तलाशी ली। वह एफआईआर में नामजद छह आरोपियों में शामिल हैं। जांच एजेंसी कथित तौर पर यह पता लगाने में जुटी है कि सरकारी अधिकारियों और सरकारी फैसलों से लाभ लेने के इच्छुक लोगों के बीच संपर्क स्थापित करने में उनकी क्या भूमिका रही। सीबीआई ने राजबीर घुमन के अलावा नितिन गोहल, जितिन गोहल उर्फ राजा, रोमी राजा महाजन, बीर देविंदर और आरएस नागरा को नामजद किया है। एफआईआर में अज्ञात सरकारी कर्मचारियों और निजी व्यक्तियों का भी उल्लेख है।
गुरकिरपाल थिंद के घर तीन घंटे चली तलाशी
फेज-11 के मकान नंबर-2638 में सीबीआई की टीम ने करीब तीन घंटे तक तलाशी ली। यह मकान गुरकिरपाल सिंह थिंद से जुड़ा बताया गया है, जिन्हें विभिन्न रिपोर्टों में राजबीर घुमन का रिश्तेदार बताया गया है। हालांकि, सीबीआई की सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नामजद आरोपियों की सूची में गुरकिरपाल थिंद का नाम शामिल नहीं है। तलाशी के दौरान टीम ने घर में मौजूद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और दस्तावेजों की जांच की। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सीबीआई ने अभी यह सार्वजनिक नहीं किया है कि इस ठिकाने से कौन-कौन सी सामग्री जब्त की गई है या जांच में थिंद की कोई अलग भूमिका सामने आई है।
61 गड़बड़ियों का है जिक्र
सीबीआई की 251 पेज की एफआईआर में ईडी की ओर से पहले उठाए गए आरोपों और सामग्री का भी उल्लेख किया गया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक एफआईआर में 61 कथित गड़बड़ियों का जिक्र है। इनमें अधिकारियों की पोस्टिंग और तबादलों को प्रभावित करने से लेकर नीतिगत फैसलों, टेंडर, लाइसेंस, जमीन और राजस्व मामलों तक प्रभाव के कथित इस्तेमाल की जांच शामिल है। एफआईआर के मुताबिक जांच का दायरा कथित भ्रष्टाचार और प्रभाव के इस्तेमाल से जुड़े संपर्कों तक है। जब्त किए गए मोबाइल, लैपटॉप और दस्तावेजों से सीबीआई यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपों से संबंधित कोई लेनदेन, बातचीत या अन्य डिजिटल साक्ष्य मौजूद हैं या नहीं।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद दर्ज हुई एफआईआर
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के निर्देश के बाद सीबीआई ने मामला दर्ज किया है। हाईकोर्ट ने ईडी की ओर से सामने रखी गई सामग्री के आधार पर सीबीआई को जांच का निर्देश दिया था। पंजाब सरकार ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। सीबीआई ने एफआईआर दर्ज करने के बाद मंगलवार को पंजाब और चंडीगढ़ में आठ स्थानों पर समन्वित तलाशी अभियान चलाया। एजेंसी के मुताबिक तलाशी में मिले इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और दस्तावेजों की जांच जारी है। मामले में आगे की जांच के साथ यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि अलग-अलग ठिकानों से मिले रिकॉर्ड आपस में किस तरह जुड़े हैं।