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Mohali News: 1530 करोड़ के बैंक घोटाले में सीबीआई कोर्ट में ट्रायल कोर्ट का आदेश रद्द

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मोहाली। बैंक घोटाले मामले में सीबीआई को बड़ी राहत मिली है। सीबीआई कोर्ट के विशेष न्यायाधीश ने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें आरोपियों को अनरिलाइड (जिन दस्तावेजों पर अभियोजन ने भरोसा नहीं किया) दस्तावेजों की कॉपी देने के निर्देश दिए थे। अदालत ने स्पष्ट किया कि चार्ज फ्रेम होने से पहले आरोपियों को अनरिलाइड दस्तावेजों की कॉपी देने का अधिकार नहीं है, बल्कि केवल उनकी सूची उपलब्ध कराई जा सकती है। अदालत ने ट्रायल कोर्ट का आदेश कानूनी रूप से गलत करार देकर उसे रद्द कर दिया। मामला सेल टैक्सटाइल्स लिमिटेड से जुड़े करीब 1530.99 करोड़ रुपये के कथित बैंक घोटाले का है।
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इस संबंध में 6 अगस्त 2020 को मामला दर्ज किया गया था। आरोप है कि कंपनी और उसके निदेशकों ने बैंकों के कंसोर्टियम से लोन लेकर धोखाधड़ी, फर्जीवाड़ा और धन के दुरुपयोग के जरिए भारी नुकसान पहुंचाया। जांच के दौरान सामने आया कि कंपनी ने विभिन्न बैंकों से टर्म लोन और कार्यशील पूंजी के रूप में ऋण लिया था, लेकिन समय पर भुगतान न करने के कारण खाते एनपीए हो गए। फोरेंसिक ऑडिट में फंड डायवर्जन, फर्जी बिक्री और विदेशों में पैसे भेजने जैसी गंभीर अनियमितताएं उजागर हुईं। इसके बाद 2018 में खाते को फ्रॉड घोषित किया गया।

सीबीआई ने 2022 में चार्जशीट दाखिल की, जिसके बाद आरोपी पक्ष ने सीआरपीसी सेक्शन 207 के तहत उन दस्तावेजों की मांग की, जिन्हें जांच के दौरान जब्त तो किया गया था, लेकिन चार्जशीट में शामिल नहीं किया गया। ट्रायल कोर्ट ने यह मांग स्वीकार कर ली थी। हालांकि, सीबीआई ने इस आदेश को चुनौती दी। विशेष न्यायाधीश ने सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि चार्ज फ्रेम होने से पहले आरोपियों को अनरिलाइड दस्तावेजों की कॉपी देने का अधिकार नहीं है, बल्कि केवल उनकी सूची उपलब्ध कराई जा सकती है।
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अदालत ने यह भी माना कि मामले में आगे जांच जारी है और इस चरण पर दस्तावेजों का खुलासा जांच को प्रभावित कर सकता है। इसलिए ट्रायल कोर्ट का आदेश कानूनी रूप से गलत करार देते हुए उसे रद्द कर दिया गया। साथ ही अदालत ने निचली अदालत को निर्देश दिए कि आरोप तय करने की प्रक्रिया को तेज किया जाए, ताकि लंबे समय से लंबित इस मामले की सुनवाई जल्द आगे बढ़ सके।
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