फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कैंटर और ट्राले की भिड़ंत से लगी आग, चालक-परिचालक जिंदा जले

विज्ञापन
विज्ञापन
लालड़ू। अंबाला-चंडीगढ़ हाईवे स्थित सरसीणी के निकट सोमवार देर रात करीब दो बजे धुंध के बीच एक ट्राले और कैंटर में भिड़ंत हो गई। हादसा इतना जबरदस्त था कि टक्कर के बाद दोनों वाहनों को आग लग गई और ट्राले के केबिन में बैठे चालक और परिचालक दोनों जिंदा जल गए। सूचना पर डेराबस्सी और अंबाला से पहुंचीं दो दमकल की गाड़ियों ने मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पाया। हादसे के करीब चार घंटे बाद आग बुझने के बाद ट्राले के चालक और परिचालक के शरीर पूरी तरह जल चुके थे। दोनों के शवों को डेराबस्सी सिविल अस्पताल की मोर्चरी में रखवा दिया गया है। अभी तक दोनों में से किसी की भी शिनाख्त नहीं हो सकी है।
विज्ञापन

पुलिस के अनुसार, 20 टायरों वाला एक बड़ा ट्राला अंबाला की ओर से आ रहा था। ट्राले में 100 से अधिक गैर ज्वलनशील केमिकल के ड्रम लोड थे, जिसको लैहली के निकट से बाईं तरफ मुड़ना था लेकिन ट्राले के चालक ने गलती से गाड़ी को सरसीणी मोड़ की तरफ मोड़ दिया, जहां से पता पूछने के बाद जब वह वापस हाईवे पर चढ़ा तभी अचानक अंबाला की ओर से प्याज से भरा एक कैंटर मुड़ रहे ट्राले के अगले हिस्से में स्थित डीजल टैंक से टकरा गया और दोनों वाहनों में तुरंत आग लग गई। कैंटर के ट्राले से सटे होने के कारण चालक की खिड़की नहीं खुल पाई और दूसरी खिड़की भी बंद हो गई। इससे समय रहते ट्राले के चालक व परिचालक दोनों बाहर नहीं निकल सके और आग की लपटों के बीच घिर जाने से जिंदा जल गए। उधर, कैंटर चालक रवि और परिचालक अजय ने समय रहते केबिन से कूदकर अपनी जान बचा ली।
जांच अधिकारी एएसआई सुलखान सिंह ने बताया कि डेराबस्सी और अंबाला से फायर ब्रिगेड की गाड़ियों ने मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पाया लेकिन आग बुझने के बावजूद भी सुलगती आग के कारण वाहनों के केबिन पूरी तरह गर्म होने के कारण खोले नहीं जा सके और शवों को करीब सुबह पांच बजे निकाला जा सका। हादसा इतना भयानक था कि बड़े ट्राले के सभी 20 टायर ट्यूब जलकर राख हो गए। ट्राले में पड़े 100 से अधिक गैर ज्वलनशील केमिकल ड्रमों में से कुछ आग की चपेट में आकर लीक हो गए, जिससे केमिकल सड़क पर बिखर गया। इससे राहगीर खासकर दोपहिया वाहन चालक हादसे का शिकार होते-होते बचे।
विज्ञापन

जांच अधिकारी सुलखान सिंह ने बताया कि केबिन के पूरी तरह जल जाने से ट्राला चालक-परिचालक सहित सभी दस्तावेज भी साथ जल गए, जिस कारण कोई जानकारी नहीं मिल पाई कि ट्राला कहां से कहां जा रहा था। साथ ही चालक और परिचालक दोनों की अभी तक शिनाख्त नहीं हो सकी है। उन्होंने बताया कि मृतकों की शिनाख्त करने की कोशिश की जा रही है। उसके बाद ही कैंटर चालक के खिलाफ केस दर्ज करने की कार्रवाई होगी। अभी दोनों ट्रकों को घटनास्थल से हटा दिया है।
ट्राले में ज्वलनशील केमिकल होता तो मच जाती तबाही
हादसे के दौरान ट्राले में 100 से अधिक ड्रमों में केमिकल भरे हुए थे, गनीमत यह रही कि केमिकल ज्वलनशील नहीं था। अगर ट्राले में ज्वलनशील केमिकल होता तो अंबाला-चंडीगढ़ हाईवे पर तबाही मच सकती थी क्योंकि घटनास्थल के निकट ही भारत गैस का एलपीजी प्लांट मौजूद होने के साथ कई फैक्ट्रियां भी हैं।
कैंटर में भरा प्याज सड़क पर बिखरा, राहगीरों ने बटोरा
हादसे के बाद कैंटर में लोड प्याज सड़क पर बिखर गया, जिसे राहगीर सुबह तक उठा-उठाकर ले गए। मंगलवार दोपहर तक प्याज बटोरने के लिए लोग कैंटर के इर्दगिर्द चक्कर काटते नजर आए। प्याज व्यापारी राकेश ने बताया उन्होंने नासिक से 11 टन प्याज कैंटर में लोड कराकर शिमला के लिए भेजा था। हादसा होने के बाद कैंटर से ढाई से 3 टन प्याज गायब है। राकेश के अनुसार, कुछ प्याज आग की भेट चढ़ गया और बाकी प्याज को लोग उठाकर ले गए। उन्होंने बताया कि कैंटर चालक रवि व परिचालक अजय का अभी तक कोई पता नहीं चल पाया है। जांच अधिकारी सुलखान सिंह ने बताया कि कैंटर में शेष बचे प्याज को उसके मालिक को सौंप दिया गया है जिस को वे दूसरे ट्रक में लोड़ कर ले गए हैं जबकि ट्राले में लोड केमिकल ड्रमों और नीचे गिरे ड्रमों को सड़क से किनारे करवा दिया गया है। मालिक के आने पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। प्याज व्यापारी राकेश ने बताया कि वो इस प्याज को वापस दिल्ली ले जा रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें