खरड़। शहर में नगर परिषद चुनाव की कोई तारीख तय नहीं हुई। लेकिन इसके बावजूद खरड़ के सभी 27 वार्डो में भावी उम्मीदवारों की दौड़ ध्ूाप तेज हो गई है। पुराने पार्षदों के अलावा नए उम्मीदवार दिनभर चुनावी रणनीति को लेकर बैठकें कर रहे हैं और अपनी-अपनी जीत पक्की करवाने की होड़ में जुटे हुए हैं। इसके साथ-साथ सुबह और शाम घर-घर जाकर लोगों को भी मिल रहे हैं। 50 प्रतिशत महिलाओं के लिए रिजर्व वार्ड होने के कारण कई पुराने पार्षदों और नए उम्मीदवारों का समीकरण बिगड़ गया है। कई उम्मीदवार मजबूरन अपने परिवार की किसी महिला को इन चुनावों के लिए खड़ा कर रहे हैं तो कईयों को मजबूरन इन चुनावों से पीछे हटना पड़ रहा है।
नगर परिषद के चुनावों की सुगबुगाहट के बीच लगभग सभी वार्डों में अपने-अपने पोस्टर लगाने का युद्घ शुरू हो गया है। पिछली बार भी रह चुके पार्षद और भावी उम्मीदवार के बीच नए साल की शुभकामनाओं के पोस्टर लगाने की आपस में होड़ मच गई है। पोस्टरों के साथ-साथ उम्मीदवार यू-ट्यूब और मोबाइल फोन पर व्हाट्सएप के माध्यम से लोगों को अपने बारे में सूचनाएं पहुंचा रहे हैं। संभावित जनवरी के आखिरी सप्ताह या फरवरी के शुरू में नगर परिषद के चुनाव के होने की उम्मीद है। यह देखते हुए शहर में अनेक समाज सेवकों की बाढ़ सी आ गई है। वैसे तो कोरोना काल से ही पूर्व पार्षदों और भावी उम्मीदवारों ने अपने-अपने वार्ड में वोटरों को रूझाने के लिए समाज सेवा के अनेक काम शुरू कर दिए थे, लेकिन अब चुनाव नजदीक आते-आते समाज सेवकों ने अपने वार्ड में समाज सेवा के अनेक काम शुरू कर दिए हैं। नगर परिषद की ओर से कुछ दिन पहले शहर के सभी 27 वार्डों की जो मतदाता सूची जारी की थी, उसमें भारी खामियां पाई गई थीं। कई वार्डों की सैकड़ों वोटें कटकर दूसरे वार्डों की सूची में जुड़ गई थी। जिसे लेकर चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों में हड़कंप मच गया था। सभी भावी उम्मीदवारों ने दिन रात जागकर इन सूचियों को दुरुस्त करके एतराज के साथ खरड़ के एसडीएम के पास ठीक करवाने के लिए जमा करवाई है। जिन पर स्थानीय प्रशासन की ओर से काम चल रहा है।
कांग्रेस और भाजपा समेत सभी पार्टियां सभी वार्डों में पार्टी के चुनाव चिन्ह पर अपने उम्मीदवार खड़ा करना चाहती हैं। लेकिन गली-मोहल्लों के चुनाव और अपने रसूख और जान पहचान के कारण अधिकांश उम्मीदवार पार्टी टिकट पर न लड़कर आजाद उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ने के इच्छुक हैं। केंद्र सरकार की ओर से पारित किए गए कृषि के नए तीन कानूनों के बाद भाजपा और शिरोमणि अकाली दल दोनों अलग-अलग हो गए हैं। इसका सीधा असर आने वाले इन नगर परिषद चुनावों में देखा जा सकता है। चुनाव की तारीख की घोषणा के बाद उम्मीदवारों में और ज्यादा सरगर्मी बढ़ जाएगी।