सड़क पर झगड़ा कर रहे सांड़ों ने स्कूटी चालक को मारी टक्कर, हाई रिस्क पर हुई सर्जरी
संवाद न्यूज एजेंसी
जीरकपुर। बेसहारा पशुओं से लोग बेहद परेशान हो चुके हैं। बलटाना के एरिया लाइट प्वाइंट पर शाम के समय सड़क पर झगड़ रहे दो सांड़ों ने स्कूटी सवार दो महिलाओं को जोरदार टक्कर मार दी। सांड़ का सींग महिला की पेट में घुसने से उसकी आंतड़ियां बाहर आ गईं।
हादसे के बाद उसे लोगों ने अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने तुरंत हाई रिस्क सर्जरी करने के लिए पौने दो लाख रुपये का खर्च बताया। जानकारी के अनुसार रविवार शाम करीब 7 बजे मॉडर्न एन्क्लेव बलटाना निवासी किरनजीत कौर अपनी सहेली रजनी के साथ वालमार्ट से अपना काम खत्म कर घर के लिए एक्टिवा पर बलटाना की तरफ जा रही थी। जैसे ही वह के एरिया लाइट प्वाइंट से बलटाना फर्नीचर मार्केट की तरफ मुड़ी तो सड़क पर झगड़ रहे दो सांड़ों ने उनको जबरदस्त टक्कर मार दी। एक सांड़ ने किरनजीत कौर के पेट में सींग घुसा दिया। आसपास के लोगों ने इकट्ठे होकर सांड़ को भगाया और महिला को उठाया लेकिन महिला के पेट की आंतड़ियां बाहर आने से सभी लोग सहम गए थे। इस दौरान वहां से निकल रहे कपिल मोहन ने महिला को गाड़ी में डालकर वीआईपी रोड पर निजी अस्पताल पहुंचाया।
एक्टिवा के पीछे बैठी रजनी को भी काफी चोटें लगीं लेकिन वह खतरे से बाहर है। घायल किरनजीत कौर के भाई मंगत ने बताया कि उसकी बहन ऑपरेशन के बाद भी वेंटिलेटर पर है। यह प्रशासन की लापरवाही है। अगर सरकार ने बेसहारा पशुओं को पकड़ा होता तो यह हादसा नहीं होता। उन्होंने लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
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2019 में सांड़ों के झगड़े में जा चुकी है एक बच्ची की जान
बलटाना मेन मार्केट में 2019 में सांड़ों के झगड़े ने मोटरसाइकिल पर जा रहे एक परिवार को रौंद दिया था। इस कारण मोटरसाइकिल पर बैठी महिला के गोद में पकड़ी छह माह की बच्ची अनाया की मौत हो गई थी और उसकी मां की टांग टूट गई थी। इसके बाद लोगों ने परिषद के खिलाफ जमकर हंगामा किया था। उसी दौरान सांड़ों ने एक सोसाइटी के 30 वाहनों को नुकसान पहुंचाया था।
कोट्सयह बेहद दुखद घटना है। हम जितने भी बेसहारा पशु यहां से निकालते हैं दूसरे शहर के लोगों द्वारा और छोड़ दिए जाते हैं। इसके लिए अब हम ठोस पॉलिसी तैयार कर रहे हैं, जिसे जल्द लागू कर दिया जाएगा।
-रवनीत सिंह, कार्यकारी अधिकारी, जीरकपुर
कोट्सशहर के लोग इतना काऊ टैक्स दे रहे हैं लेकिन सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। परिषद के खाते में 150 करोड़ के फंड हैं। रोज बेसहारा पशुओं से कोई न कोई हादसा होता है, कई लोग जान गंवा चुके हैं लेकिन फिर भी प्रशासन मौन है। हमारी तो यही मांग है कि जल्द से जल्द सड़कों पर घूम रहे बेसहारा पशुओं का कोई ठोस हल किया जाए। -कपिल मोहन, समाजसेवी
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बेसहारा पशुओं के बारे में लोग शिकायतें करके थक चुके हैं लेकिन अधिकारी पल्ला झाड़ लेते हैं। हमारी तो यही मांग है कि लोगों की जिंदगी का मूल्य समझते हुए इस समस्या का स्थायी हल किया जाए।
- जसदीप सिंह, जीरकपुर