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मेडिकल कॉलेज में ब्लड बैंक की अति आधुनिक मशीने फांक रही है धूल

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मोहाली। फेज-6 में सरकार ने आधुनिक मेडिकल कॉलेज डॉ. बीआर आंबेडकर राज्य आयुर्विज्ञान संस्थान बनाया है। वहां लाखों रुपये की लागत से अस्पताल के ब्लड बैंक के लिए खरीदी गई अत्याधुनिक मशीनें धूल फांक रही हैं। कागजी कार्रवाई के चक्कर में मशीनें प्रयोग नहीं हो पा रही हैं। मामला सेहत विभाग के ध्यान में है लेकिन इसके बाद भी इस दिशा में तेजी से काम नहीं हो रहा है। इसका खामियाजा मरीजों व उनके तीमारदारों को उठाना पड़ रहा है। उन्हें गंभीर हालत में खून के लिए चंडीगढ़ या पंचकूला के अस्पतालों के चक्कर लगाने पड़ते हैं।
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यहां इलाज के लिए केवल मोहाली ही नहीं बल्कि अन्य जिलों से भी मरीज आ जाते हैं। वहीं वीआईपी ड्यूटी भी इसी मेडिकल कॉलेज के स्टाफ पर निर्भर है। ऐसे में यहां के ब्लड बैंक में पूरी सुविधाएं न होने के कारण कई मरीजों को काफी मुश्किलों को सामना करना पड़ता है। हालात यह है कि जिन केसों में खून की जरूरत होती है, उन्हें सीधे यहां से रेफर कर दिया जाता है। हालांकि नेशनल ब्लड पॉलिसी और पंजाब स्टेट एड्स कंट्रोल सोसायटी के नियम अनुसार पंजाब के ब्लड बैंक में किसी स्वस्थ व्यक्ति का रक्त सीधे नहीं चढ़ाया जा सकता। रक्त चढ़ाने से पहले रक्त में से प्लाज्मा और रेड ब्लड सेल -पीआरबीसी को अलग किया जाता है। वहीं इस समय मोहाली में मरीजों को होल ब्लड ही दिया जा रहा है। इसमें एक रक्तदान करने वाले व्यक्ति के शरीर में पाए जाने वाले बैक्टीरिया और अन्य तरह की बीमारियों बीमार मरीज के शरीर में चले जाने का खतरा रहता है। इस समय डेंगू, मलेरिया, व स्वाइन फ्लू जैसे वायरस फैल रहे हैं जहां प्लाज्मा और रेड सेल जैसे चीजों की मरीज को जरूरत होती है।
प्लाजमा लंबे समय तक होगा स्टोर
ब्लड बैंक लाखों की कीमत वाले नए सात उपकरण शामिल किए गए हैं। इन मशीनों में से एक मशीन का ऑर्डर आना बाकी है जो काफी महत्वपूर्ण है। इससे सफेद सेल यानी प्लाज्मा को लंबे समय तक स्टोर किया जा सकेगा।
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उपकरण मात्रा
प्लाज्मा एक्सप्रेस 1
डीप फ्रीजर -40, 300 एल 2
डीप फ्रीजर -80, 300 एल 2
रेफ्रिजेरेटर सेंट्रीफ्यूज/क्रायोफ्यूज 1
ब्लड एजीटेटर कुछ दिनों तक होगी उपलब्ध
3 पार्ट ऑटोमेटिक सेल काउंटर 1
सेमी ऑटोमेटिक कोगुलोमीटर 2
इमरजेंसी में वालंटियर रक्त देने को रहते हैं तैयार
मेडिकल कॉलेज में आने वाले मरीजों में रक्त की सीधे तौर पर कोई बड़ी मांग नहीं है। वहीं जब कभी भी हमें इमरजेंसी होती है तो हमारे पास कुछ ऐसे वालंटियर है जो एक फोन करने पर रक्त देने पहुंच जाते हैं। अस्पताल में सीधे तौर पर कोई रक्तदान नहीं करता। ऐसे में हमारे पास सिर्फ रक्तदान कैंप के दौरान इकट्ठा हुआ रक्त ही होता है। हम चंडीगढ़ जैसे बड़े संस्थानों पर निर्भर करते हैं। यहां मरीज को होल ब्लड देने का प्रावधान है और ऐसे कहीं नहीं लिखा गया कि मरीज को होल ब्लड नहीं चढ़ाया जा सकता। हमारे पास नई मशीनरी आ गई है। उम्मीद है कि जल्द लोग इसका फायदा उठा पाएंगे। -डॉ. संध्या शर्मा, ब्लड ट्रांसफ्यूजन अफसर
कोट
मशीनों को आए एक महीने का समय हो गया है लेकिन यह मेडिकल कॉलेज के अधीन आई है। इसे ब्लड बैंक में इस्तेमाल करने के लिए लाइसेंस मिलने में समय लग रहा है। इस समय चल रही बीमारियों में मशीनें इस्तेमाल नहीं हो पाएंगी। अक्तूबर तक कागजी काम पूरा होते ही इन्हें इस्तेमाल किया जाएगा। ऐसे में इन मशीनों बंद ही रखा है। -डॉ. भवनीत भारती, डायरेक्टर प्रिंसिपल
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