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जीरकपुर में सड़क हादसों का कारण बन रहे ब्लैक स्पॉट

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जीरकपुर। डेराबस्सी सब-डिवीजन में दुर्घटनाओं का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है। वहीं विभाग दुर्घटना संभावित क्षेत्र (ब्लैक स्पॉट) को दूर करने की जहमत नहीं उठा रहा है। अगर सिर्फ जीरकपुर की बात करें तो यहां 22 दुर्घटना संभावित क्षेत्र हैं। यहां सड़क हादसे होने की मुख्य वजह ऐसी जगह पर साइन बोर्ड, लाइटिंग की कमी व स्पीड ब्रेकर का नहीं होना है। इनमें जल्द सुधार करने की जरूरत है ताकि सड़क दुर्घटनाओं को रोका जा सके। इस लापरवाही के लिए प्रशासन, नेशनल हाईवे अथॉरिटी, पीडब्ल्यूडी, नगर काउंसिल व यातयात पुलिस विभाग जिम्मेदार है क्योंकि न तो हाईवे सुरक्षित हैं और न ही संपर्क मार्ग। बता दें कि सब-डिवीजन डेराबस्सी के तीन बड़े शहरों डेराबस्सी, जीरकपुर व लालड़ू के बीचोंबीच से हाईवे गुजर रहा है और कहीं-कहीं तो सड़क की चौड़ाई भी कम है।
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पांच या इससे अधिक मौत का मतलब ब्लैक स्पॉट
यातायात पुलिस की माने तो ब्लैक स्पॉट समय के साथ बदलता है। ब्लैक स्पॉट का चयन उन स्थानों में पिछले तीन साल में हुए मौतों और दुर्घटना के आंकड़ों के आधार पर किया जाता है। यदि किसी स्थान पर पिछले तीन साल में पांच या इससे अधिक मौतें हुई हैं तो उसे ब्लैक स्पॉट के रूप में चिन्हित किया जाता है।
बैठक तक सिमटा मुद्दा
सड़क हादसों के कारणों को दूर करने का मुद्दा रोड सेफ्टी की हर बैठक में उठता है। उच्चाधिकारी कारणों को दूर करने के निर्देश देते हैं, लेकिन इनका पालन नहीं होता। कार्रवाई एक-दूसरे विभाग को पत्र लिखने तक सिमट कर रह जाती है। सड़कों पर पैदल पार पथ न होने की वजह से लोगों ने मनमर्जी से पैदल पथ बना लिए हैं। जीरकपुर के मेट्रो मॉल के नजदीक अक्सर जान जोखिम में डालकर लोग तेज रफ्तार ट्रैफिक के बीच सड़क पार करते दिख जाते हैं। सड़कों से कई जगह सांकेतिक बोर्ड व रेलिंग भी गायब है। ऐसी स्थिति में रात के समय सड़क हादसों की संभावना और भी बढ़ जाती है।
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इन जगहों पर सड़क हादसों की संभावना बढ़ी
6 किलोमीटर लंबे पीआर 7 एयरपोर्ट रोड पर।
जीरकपुर चंडीगढ़ बैरियर पर।
टीएम पेट्रोल पंप के सामने।
मेट्रो मॉल के नजदीक।
सिंघपुरा चौक पर।
मैक्डोनल्ड चौक पर।
भंखरपुर गांव के पास पड़ते फ्लाईओवर पर।
पटियाला रोड के छत लाइट्स पर।
नाभा सीएनजी पंप के पास।
पटियाला चौक पर।
हादसे कम हों, इसलिए हाईवे पर कम से कम कट रखती है एनएचआई
दुर्घटना संभावित क्षेत्र के बारे में राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचआई) की देखभाल करने वाली कंपनी जीएमआर के प्रवक्ता इकबाल सिंह ने बताया कि प्राधिकरण की कोशिश यह रहती है कि राजमार्ग पर कट्स कम से कम हों। वहीं गति नियंत्रक बोर्ड व साइन बोर्ड भी लगाए गए हैं। अभी ब्लैक स्पॉट्स की एडवाइजरी की मुझे जानकारी नहीं है, जो भी आदेश होंगे, उनका पालन किया जाएगा। मेट्रो मॉल के नजदीक लोगों द्वारा बनाए गए शॉर्टकट को वे कई बार बंद करवा चुके हैं, लेकिन लोग खुद नया रास्ता बना लेते हैं जिससे दुर्घटनाएं होती हैं।
कोट्स
सड़क हादसों के कारणों को दूर करने व साइन बोर्ड्स लगाने के लिए संबंधित विभागों को आदेश दे दिए हैं। रोड सेफ्टी की बैठक में इस मुद्दे पर विशेष रूप से चर्चा हुई है। हमारा प्रयास है कि सड़कों पर हादसे कम से कम हों। -शरद सत्य चौहान, एडीजीपी ट्रैफिक
हर महीने सड़क सुरक्षा पर डीसी मोहाली मीटिंग लेते हैं। अभी हाल ही में ब्लैक स्पॉट्स को चिन्हित कर वहां पर दुर्घटना संभावित क्षेत्र के बोर्ड लगाने के आदेश मिले हैं, जिन्हें जल्द पूरा कर दिया जाएगा। -सुखजिंदर सिंह सिद्धू, ईओ नगर काउंसिल
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