मोहाली। 21.95 लाख की धोखाधड़ी में दो आरोपियों की जमानत याचिका जिला अदालत ने रद्द कर दी है। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुनाया कि आरोपी उस भूखंड का मालिक नहीं था जिस बारे में उसने शिकायतकर्ता को एलओआई देने का वादा किया था। अदालत ने कहा कि आरोपी के वकील ने तर्क दिया है कि यह एक सिविल विवाद है, लेकिन मामले के तथ्यों और परिस्थितियों से यह पूरी तरह से सिविल विवाद नहीं कहा जा सकता।
अदालत ने कहा कि आरोपी प्लॉट का मालिक नहीं था और उसके पास प्लॉट संबंधी दस्तावेज नहीं थे, जिससे स्पष्ट है कि उसका इरादा एग्रीमेंट को पूरा करना नहीं था। पूछताछ के दौरान आरोपी राजेश गुप्ता ने जांच अधिकारी के समक्ष यह स्वीकार करते हुए बयान दिया कि उसने शिकायतकर्ता से 21.95 लाख रुपये प्राप्त किए हैं। उसने यह कहकर चालाकी दिखाने की कोशिश की है कि शिकायतकर्ता ने एग्रीमेंट और खाली कागजों पर हस्ताक्षर किए थे। आरोपी के खिलाफ अन्य शिकायत रवि गोयल ने दर्ज कराई है, जो जांच के लिए लंबित बताई है।
मामले में सहआरोपी शिवम गुप्ता ने गवाह के तौर पर समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। वहीं सुनवाई दौरान एएसआई रमेश लाल ने अदालत में बयान दर्ज करवाया कि आरोपी से हिरासत में पूछताछ की जरूरत है क्योंकि आशय पत्र बरामद किया जाना है। अदालत ने कहा कि आरोपियों को अग्रिम जमानत देने का आधार नहीं बनता। इसके बाद अदालत ने जमानत याचिका रद्द कर दी है।
यह है मामला
आरोपियों के खिलाफ 16 अगस्त 2024 को राजेश गोयल की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया था। राजेश गोयल ने शिकायत में कहा था कि वह मोहाली में संपति खरीदने में रुचि रखता था। वह दोस्त अमित गर्ग के माध्यम से राजेश गुप्ता के संपर्क में आया था। राजेश गुप्ता ने बताया कि उसके पास गमाडा ने एरोट्रोपोलिस के नाम पर डी ब्लॉक स्कीम में 100 वर्ग गज का रिहायशी प्लॉट है। राजेश गुप्ता ने कहा था कि उन्हें पैसों की तत्काल आवश्यकता है और वे एलओआई के विरुद्ध अधिकार ट्रांसफर करना चाहता है। प्लॉट की कीमत 43.90 लाख रुपये तय हुई।
वह एलओआई के विरुद्ध आवंटित प्लॉट को खरीदने के लिए सहमत हो गए। शिकायतकर्ता को बताया कि उन्हें पहले आधी राशि 21.95 लाख का भुगतान करना होगा और शेष 50 फीसदी गमाडा द्वारा आशय पत्र (एलओआई) जारी करने के 30 दिनों में देनी होगी। अमित गर्ग और शिवम गुप्ता पुत्र राजेश गुप्ता ने गवाह के तौर पर समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।
थोड़े दिन बाद आरोपी ने जवाब दिया कि प्लॉट की कीमत अधिक हो गई हैं, इसलिए उसने शिकायतकर्ता को प्लॉट बेचने का अपना मन बदल लिया। इसके बाद राजेश गुप्ता और उनके बेटे शिवम गुप्ता ने सौदा करने से इन्कार कर दिया और उन्होंने उसे गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी। इस प्रकार, उसके साथ धोखाधड़ी की गई। रकम लेने उपरांत ना तो प्लॉट की रजिस्ट्री उसके नाम पर करवाई गई और ना ही रकम वापस की गई।