मोहाली। नगर निगम सीमा विस्तार में शामिल नहीं करने पर गांव बड़ माजरा और इससे सटी काॅलोनी के लोगों में नाराजगी है। बड़ी संख्या में लोगों ने नगर निगम में शामिल नहीं करने पर नाराजगी प्रकट की है। लोगों का कहना है कि शहर में रहने के बावजूद उनको बुनियादी सुविधाओं से वंचित रखा जा रहा है। अमर उजाला ने उनकी आवाज को उठाने के लिए मंगलवार को संवाद का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में पवन प्रताप, राजकुमार, रीना, हीरा लाल, जीत सिंह, गंगा प्रसाद गुप्ता, महताब, शीला, लक्ष्मी, चित्रा गुरूंग, बादशाह पाल समेम अनेक लोग मौजूद रहे। नाराज लोगों का कहना था कि बुनियादी सुविधाएं नहीं मिलने से उनका जीवन दूभर हो गया है। नाराज लोगों का कहना है कि उनकी मांग नहीं सुनी गई तो वे लोग हाईकोर्ट जाने से भी गुरेज नहीं करेंगे।
विरोध का मुख्य कारण : सुविधाओं का अभाव
गंदगी और सीवरेज : ग्रामीणों ने बताया कि पूरे गांव में गंदगी का अंबार लगा रहता है, उचित सीवर व्यवस्था का अभाव है।
स्वास्थ्य और सुरक्षा : डिस्पेंसरी और स्ट्रीट लाइट्स जैसी आवश्यक सुविधाएं गांव में मौजूद नहीं हैं, जिससे स्वास्थ्य और सुरक्षा दोनों प्रभावित होती हैं।
प्रदूषण की समस्या : लोगों ने शिकायत की कि खुले में कचरा जलाया जाता है। इससे सांस लेना तक मुश्किल हो गया है।
जनसंख्या : गांव बड़ माजरा और कॉलोनी में करीब 10 हजार लोगों की आबादी रहती है, जो इन समस्याओं से जूझ रही है।
पक्ष में उठाएंगे आवाज
सरकार नहीं चाहती कि गांवों को शहरों जैसी सुविधा मिले। यह हर घर की मांग है कि बड़ माजरा गांव और कॉलोनी नगर निगम में शामिल हो। इसके पक्ष में हम आवाज उठाएंगे। - पवन प्रताप
टैक्स और चार्जेस चुकाने को तैयार
सीमा विस्तार के विरोध के दौरान जब यह सवाल किया गया कि नगर निगम में शामिल होने पर लोगों को टैक्स और अन्य चार्जेज चुकाने होंगे, तो ग्रामीणों ने एकमत से जवाब दिया कि वे इसके लिए पूरी तरह से तैयार हैं। उनका कहना था कि वैसे भी वे बिजली का बिल, टैक्स आदि भरते हैं। उनकी प्राथमिकता सुविधा और बेहतर जीवन है।
आंदोलन करने की दी चेतावनी
ग्रामीणों ने अपनी मांग को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि उनके गांव और कॉलोनी को नगर निगम में शामिल नहीं किया गया, तो वे हाईकोर्ट का रुख करेंगे। गांव बड़ माजरा और कॉलोनी के निवासियों का मानना है कि सुविधाओं के अभाव में बेहतर जीवन उनका अधिकार है। इसके लिए वे किसी भी कीमत पर नगर निगम में शामिल होना चाहते हैं। स्थानीय प्रशासन के लिए यह एक बड़ी चुनौती है कि वह इन निवासियों की मांग को किस तरह से संबोधित करता है।