मोहाली। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की अदालत ने एक मामले में आरोपी धर्मपाल मेहता की नियमित जमानत अर्जी खारिज कर दी है। आरोपी पर आरोप है कि उसने अपने साथियों के साथ मिलकर अदालत में फर्जी जमानती दस्तावेज पेश करके एक वाहन छुड़ाने की कोशिश की थी।
यह मामला सोहाना थाने में दर्ज 29 जनवरी 2025 से संबंधित है जिसमें भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है। आरोपी ने वाहन की सुपुर्दगी के लिए अदालत में 35 लाख रुपये के जमानत बांड पेश किए थे जिसमें हरचरण सिंह नाम के व्यक्ति को जमानतदार और सन्नी नाम के व्यक्ति को पहचानकर्ता बताया गया था। जब अदालत ने ज़मानत दस्तावेजों की जांच की तो पाया गया कि हरचरण सिंह द्वारा पेश भूमि के मूल्यांकन की रिपोर्ट जाली थी। फिरोजपुर के तहसीलदार ने पुष्टि की कि उनके कार्यालय द्वारा ऐसी कोई रिपोर्ट जारी नहीं की गई थी। साथ ही पहचानकर्ता सन्नी भी अपनी पहचान के बारे में कोई संतोषजनक जानकारी नहीं दे सका।
अदालत ने फैसले में कहा कि आरोपियों ने न्यायिक प्रक्रिया को धोखा देने और जाली दस्तावेजों से अदालत को गुमराह करने का प्रयास किया है। इसलिए आरोपियों को नियमित जमानत देने का कोई आधार नहीं है। अदालत ने आरोपियों की जमानत अर्जी खारिज कर दी।